जयपुर। फागी के रामचंद्रपुरा की 7 साल की भव्या चौधरी ने दादा के देहांत के बाद पगड़ी रस्म पूरी की। पगड़ी रस्म के वक्त गांव में रहने वाले सभी लोगों की आंखे छलक पड़ी । मासूम सी बच्ची के कंधों पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी और उसके बचपन को देखते हुए हर आदमी की आंखे नम हो गई। वहीं मासूम बच्ची ने अपना दिल मजबूत करते हुए हर रस्म को हंसते हुए पूरा किया।
पहले पिता अब दादा का निधन
गौरतलब है कि रामचद्रपुरा में रहने वाली भव्या के पिता हनुमान सहाय राजस्थान पुलिस में तैनात थे। जिनकी वर्ष 2018 में ड्यूटी के दौरान मौत हो गई। इस हादसे में परिवार के लोगों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। लेकिन बुजुर्ग दादा ने परिवार की जिम्मेदारी संभाली । लेकिन नियति को कुछ ओर ही मंजूर था। 10 दिन पूर्व 10 जनवरी को भव्या के सिर से दादा का साया उठ गया और दादा का भी निधन हो गया। जिसके बाद पूरे मौहल्ले में शोक की लहर छा गई।

7 साल की भव्या ने अपने दादा के अंतिम संस्कार से लेकर पगड़ी रस्म को संभाला और महिला सशक्तिकरण का जीता जागता उदाहरण पेश किया। बताया जा रहा है की भव्या की मां भी पुलिस में तैनात है। पगड़ी रस्म निभाते समय जहां भव्या ने हिम्मत का परिचय दिया वहीं गांव के लोगों की आंखों से आंसू छलक पड़े। गांव के लोगों ने एक -दूसरे को ढांढस बंधाया। गांव के सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में पगड़ी रस्मे पूरी हुई.
क्यों होती है पगड़ी रस्म ?
परिवार के मुखिया के निधन के बाद परिवार को उत्तराधिकारी देने के लिए पगड़ी रस्म निभाई जाती है। पगड़ी रस्म के बाद समाज परिवार का नया मुखिया चुन कर उसे परिवार की जिम्मेदारी सौंपता है। पगड़ी रस्म होने के बाद परिवार के मान सम्मान, सुरक्षा और कल्याण की पूरी जिम्मेदारी उस शख्स के कंधों पर है जिसको पगड़ी पहनाई गई है।




