जयपुर। सरकार द्वारा पिछले वर्ष अक्टूबर में घोषित 1,500 करोड़ की क्रिटिकल मिनरल रीसाइक्लिंग इंसेंटिव स्कीम को अब पूरी तरह लागू कर दिया गया है और इसे रीसाइक्लिंग उद्योग से मजबूत समर्थन मिल रहा है। अब तक 70 से अधिक रीसाइक्लिंग कंपनियां इस योजना के तहत पंजीकरण करा चुकी हैं, जबकि 10 से अधिक कंपनियों को पात्रता की स्वीकृति भी मिल चुकी है। यह जानकारी जवाहरलाल नेहरू एल्युमिनियम रिसर्च, डेवलपमेंट एंड डिजाइन सेंटर के निदेशक डॉ. अनुपम अग्निहोत्री ने मटीरियल रीसाइक्लिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एमआरएआई) द्वारा आयोजित इंटरनेशनल मटीरियल रीसाइक्लिंग कॉन्फ्रेंस – 2026 में अपने संबोधन के दौरान दी।
डॉ. अग्निहोत्री ने बताया कि इस योजना का लक्ष्य 2.7 लाख मीट्रिक टन रीसाइक्लिंग क्षमता का सृजन करना है। उन्होंने कहा, ‘भारत ने 24 महत्वपूर्ण खनिजों की पहचान की है, जिनमें से अधिकांश अभी भी आयात पर निर्भर हैं। ऐसे में स्क्रैप की उपलब्धता, उसका प्रसंस्करण और रिकवरी एक रणनीतिक प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि कई देश संसाधन राष्ट्रवाद की ओर बढ़ रहे हैं और जल्द ही वे केवल अयस्क ही नहीं, बल्कि स्क्रैप और अपशिष्ट के निर्यात पर भी प्रतिबंध लगा सकते हैं। भारत को अभी कदम उठाने होंगे.’

कॉन्फ्रेंस में उद्योग की ओर से ग्रेविटा इंडिया लिमिटेड के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर विजय पारेख ने कहा कि यह योजना स्पष्टता लेकर आई है, जिससे निवेशकों और रीसाइक्लर्स का भरोसा बढ़ा है. MRAI प्रवक्ता प्रमोद शिंदे ने बताया कि जेईसीसी में हुए तीन दिवसीय कॉन्फ्रेंस में 40 देश के 450 से ज्यादा और ओवरऑल लगभग 2700 विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। इस दौरान यहां हुए विभिन्न सत्रों में रीसायकल को प्रमोट करने और लोगों को इसके लिए जागरूक करने के लिए विशेषज्ञों ने अपने विचार व्यक्त किए। शिंदे ने बताया कि भारत में अभी भी रीसाइक्लिंग की रेट काफी कम है जिसको लेकर इंडस्ट्री, खनन और अन्य क्षेत्रों से जुड़े लोग काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में रीसायकल इंडस्ट्री गेम चेंजर के रूप में साबित होगी। सम्मेलन के अवसर पर बैटरी रीसाइक्लिंग एक्सीलेंस अवॉर्ड्स 2026 भी प्रदान किए गए।
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