जोधपुर। राजस्थान से जुड़ी दो अहम मांगों- आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के आरक्षण की पात्रता में संभावित बदलाव और राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता को लेकर केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने सकारात्मक संकेत दिए हैं। शनिवार को जोधपुर सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि EWS आरक्षण के मौजूदा नियमों में बदलाव को लेकर केंद्र सरकार के स्तर पर विचार-विमर्श चल रहा है। वहीं, राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता देने के मुद्दे पर भी सरकार में चर्चा जारी है। शेखावत के बयान के बाद खेती पर निर्भर परिवारों के लिए EWS आरक्षण की पात्रता और राजस्थानी भाषा की संवैधानिक मान्यता को लेकर उम्मीदें फिर बढ़ी हैं। हालांकि, दोनों मुद्दों पर अंतिम निर्णय सरकार की ओर से लिया जाना बाकी है।
EWS आरक्षण के नियमों में बदलाव पर बोले गजेंद्र सिंह शेखावत
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण देकर महत्वपूर्ण कदम उठाया था। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014-15 में भी उन्होंने इस विषय को लेकर लोकसभा में आवाज उठाई थी। शेखावत के अनुसार, मौजूदा EWS पात्रता नियमों के कारण कृषि पर निर्भर कुछ परिवारों के सामने परेशानी पैदा होती है। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेती आजीविका का प्रमुख या एकमात्र साधन है। ऐसे परिवारों की आर्थिक स्थिति का आकलन करते समय मौजूदा पात्रता प्रावधानों को लेकर सवाल उठते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि इस विषय पर हाल में बैठक हुई है और केंद्र सरकार के स्तर पर समाधान तलाशने की कोशिश की जा रही है। उम्मीद जताई गई है कि सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद आगे का रास्ता निकाला जा सकता है।
खेती करने वाले परिवारों को EWS पात्रता में क्यों होती है परेशानी?
शेखावत ने कहा कि ऐसे परिवारों के साथ न्याय होना चाहिए, जिनकी आजीविका पूरी तरह खेती पर निर्भर है। उन्होंने ग्रामीण पृष्ठभूमि के साथ-साथ शहरों में रहने वाले उन परिवारों का भी उल्लेख किया, जिनकी आय का मुख्य आधार कृषि है। EWS आरक्षण की पात्रता निर्धारित करने वाले नियमों को लेकर लंबे समय से विभिन्न पक्षों की ओर से सवाल उठाए जाते रहे हैं। इस मामले में कृषि भूमि, परिवार की आर्थिक स्थिति और निर्धारित पात्रता मानकों के बीच संबंध महत्वपूर्ण है। केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, इस विषय को सरकार के सामने उठाया गया था, लेकिन यूथ फॉर इक्वलिटी की विशेष अनुमति याचिका (SLP) सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने के कारण निर्णय नहीं हो सका। उन्होंने बताया कि अब याचिका का निपटारा हो चुका है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार को इस विषय पर निर्णय लेते समय पूरे देश की परिस्थितियों को ध्यान में रखना होगा। कुछ राज्यों का मत मौजूदा नियमों में बदलाव नहीं करने के पक्ष में भी है। ऐसे में सभी पक्षों पर विचार करने के बाद ही समाधान निकलने की संभावना है।
राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता पर जल्द निर्णय की उम्मीद
राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने के सवाल पर गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि वह वर्ष 1991 से इस मांग के समर्थन में संघर्ष के साथ खड़े हैं। उन्होंने इसे राजस्थान के लोगों की अस्मिता और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा विषय बताया। शेखावत के अनुसार, विभिन्न भाषाओं को संवैधानिक मान्यता देने से संबंधित 32 से अधिक प्रस्ताव लंबित हैं। गृह मंत्रालय का संबंधित विभाग इस दिशा में काम कर रहा है और सरकार के स्तर पर विचार-विमर्श जारी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राजस्थानी भाषा की मान्यता के विषय में जल्द निर्णय हो सकता है। हालांकि, उन्होंने कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई।
नेपाल में राजस्थानी भाषा की पहचान का भी किया जिक्र
केंद्रीय मंत्री ने राजस्थानी भाषा को मान्यता देने के पक्ष में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाली पहचान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राजस्थानी, भोटी और भोजपुरी जैसी भाषाओं की अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान है और भारत के बाहर भी इन्हें विभिन्न क्षेत्रों में पहचान मिली है। शेखावत ने नेपाल में राजस्थानी भाषा की पहचान, हिमालयी क्षेत्रों में भोटी और गिरमिटिया भारतीयों के माध्यम से विभिन्न देशों में भोजपुरी के प्रसार का जिक्र किया। उनके अनुसार, भाषाओं की सांस्कृतिक विरासत और व्यापक पहचान को देखते हुए उन्हें संवैधानिक मान्यता देने की मांग महत्वपूर्ण है। राजस्थानी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने से भाषा के संरक्षण, प्रचार-प्रसार और सांस्कृतिक पहचान को मजबूती मिलने की उम्मीद की जाती है।
पंचायत चुनाव में BJP की जीत का दावा
मीडिया से बातचीत के दौरान गजेंद्र सिंह शेखावत ने राजस्थान के आगामी पंचायती राज चुनावों को लेकर भी भाजपा की रणनीति और संभावनाओं पर बात की। उन्होंने कहा कि भाजपा का कार्यकर्ता केवल चुनाव के समय सक्रिय नहीं होता, बल्कि पूरे पांच साल सामाजिक सरोकारों, संगठन के विस्तार और विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए काम करता है। उन्होंने विश्वास जताया कि पार्टी पंचायत चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करेगी। शेखावत के मुताबिक, चुनाव के दौरान संगठन के कार्यकर्ताओं की मेहनत और जनसंपर्क को एकजुट करके जीत हासिल करने का प्रयास किया जाएगा।
राजस्थान में तीसरा इंजन जोड़ने की भाजपा की रणनीति
शेखावत ने कहा कि भाजपा का लक्ष्य राज्य में डबल इंजन की सरकार के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी तीसरा इंजन जोड़ना है। उनके अनुसार, नगरीय निकाय चुनावों में पार्टी कई शहरी क्षेत्रों में अपने बोर्ड बनाने में सफल रही है और अब पंचायत चुनावों में भी इसी तरह का प्रदर्शन करने की उम्मीद है। उन्होंने दावा किया कि राजस्थान में 70 प्रतिशत से अधिक नगरीय निकायों में भाजपा के बोर्ड बने हैं। इसी आधार पर उन्होंने पंचायती राज चुनावों में भी पार्टी की संभावनाओं को मजबूत बताया। हालांकि, पंचायत चुनावों का वास्तविक परिणाम मतदाताओं के फैसले और चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
पिछले चुनावों का हवाला देकर जताया बेहतर प्रदर्शन का भरोसा
केंद्रीय मंत्री ने राजस्थान के पिछले 35 वर्षों के चुनावी इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में भाजपा की सरकार रहने के दौरान पार्टी को जिला प्रमुखों के चुनाव में सामान्य तौर पर बेहतर सफलता मिलती रही है। उन्होंने कहा कि जब भाजपा सत्ता में नहीं होती थी, तब जिला प्रमुखों की संख्या कम रह जाती थी। शेखावत ने पिछली कांग्रेस सरकार के समय हुए पंचायत और जिला परिषद चुनावों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कार्यकाल में पांच चरणों में चुनाव होने के बावजूद भाजपा के 19 जिलों में बोर्ड बने थे। उन्होंने इसे उस समय का बेहतर प्रदर्शन बताते हुए दावा किया कि आगामी पंचायती राज चुनावों में पार्टी इससे भी अच्छा प्रदर्शन करने की उम्मीद कर रही है।
EWS आरक्षण और राजस्थानी भाषा पर अब आगे क्या?
गजेंद्र सिंह शेखावत के बयान से राजस्थान से जुड़े दो महत्वपूर्ण विषय फिर चर्चा में आ गए हैं। एक ओर खेती पर निर्भर परिवारों के लिए EWS आरक्षण की पात्रता के नियमों में संभावित बदलाव की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता देने की मांग पर भी सरकार के स्तर पर विचार जारी है। फिलहाल दोनों विषयों पर अंतिम सरकारी निर्णय का इंतजार है। EWS नियमों में बदलाव की स्थिति और राजस्थानी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की दिशा में आगे की कार्रवाई आने वाले समय में महत्वपूर्ण रहेगी।



