Bihar News: असम में हुए विमान हादसे में शहीद हुए भारतीय वायुसेना के फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार की शहादत के बाद अब अनुग्रह राशि को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. बिहार सरकार की ओर से दी गई 21 लाख रुपये की सहायता राशि शुभम की कथित पत्नी श्रेया राय को सौंपे जाने के बाद परिवार ने कई सवाल उठाए हैं. साथ ही उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से आग्रह किया है कि परिवार को उचित आर्थिक सहायता प्रदान की जाए.
जानकारी के अनुसार, हुलासगंज प्रखंड के बनवरिया गांव निवासी फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार 13 जून को एक सैन्य मिशन के दौरान वीरगति को प्राप्त हो गए थे. उनकी शहादत की खबर से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई थी. अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे.
परिवार को कोर्ट मैरिज की नहीं थी जानकारी
बताया जा रहा है कि आजमगढ़ निवासी श्रेया राय और शुभम कुमार एक-दूसरे को लंबे समय से जानते थे और दोनों विवाह करना चाहते थे. परिवार को उनके रिश्ते की जानकारी थी और शादी के लिए भी सहमति मिल चुकी थी. इसी वर्ष नवंबर में दोनों की शादी प्रस्तावित थी, लेकिन शुभम की दादी के निधन के कारण विवाह को वर्ष 2027 की होली तक टाल दिया गया था.
हालांकि अब दावा किया जा रहा है कि शुभम और श्रेया ने पहले ही कोर्ट मैरिज कर ली थी. परिवार का कहना है कि उन्हें इस विवाह की कोई जानकारी नहीं थी. शुभम के पार्थिव शरीर के गांव पहुंचने पर श्रेया भी परिवार के साथ मौजूद थीं और अंतिम संस्कार के लिए गया तक गई थीं.
कैसे शुरू हुआ विवाद ?
विवाद तब शुरू हुआ जब वायुसेना अधिकारियों द्वारा शुभम की मां को तिरंगा और उनकी सैन्य टोपी सौंपे जाने के साथ ही बिहार सरकार की ओर से 21 लाख रुपये की अनुग्रह राशि का चेक श्रेया राय को दे दिया गया. यह चेक हुलासगंज के अंचल अधिकारी (सीओ) द्वारा सौंपा गया था.
शुभम के पिता का आरोप
शुभम के पिता अमरेंद्र शर्मा का आरोप है कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई. उन्होंने कहा कि यदि श्रेया वास्तव में उनके बेटे की पत्नी हैं तो वह परिवार की बहू हैं और सहायता राशि पाने की हकदार भी हैं. लेकिन उसे पत्नी होने का फर्ज भी निभाना चाहिए था, श्राद्धकर्म से पहले ही श्रेया का वापस अपने शहर लौट जाना उन्हें दुखी कर गया. उनका मानना है कि ऐसे कठिन समय में परिवार के साथ रहना चाहिए था.
उन्होंने आगे मेरा बेटा वीरगति को प्राप्त हुआ है , परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. इस दुख को बांटने के लिए सरकार थोड़ी मदद बलिदान परिवारों को आर्थिक सहायता देकर करती है, जिससे मुझे वंचित किया जा रहा है। मैं काफी गरीब हूं, मेरा बेटा शुभम ही हमारा सहारा था, उसके खोने के बाद अब हमारे पास कुछ नहीं बचा है.
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