Chandra Grahan 2026: फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा, मंगलवार 3 मार्च 2026 को वर्ष का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। यह खगोलीय दृष्टि से पूर्ण (टोटल) चंद्र ग्रहण है, किंतु जयपुर सहित पश्चिमी भारत में इसका दृश्य प्रभाव आंशिक रहेगा। पंचांग गणना के अनुसार जयपुर में चंद्र ग्रहण का स्पर्श दोपहर बाद आरंभ होगा, जबकि चंद्रोदय के साथ ही आंशिक अवस्था में ग्रहण देखा जा सकेगा।
जयपुर में ग्रहण का समय (स्थानीय समयानुसार)
प्रथम स्पर्श (पेनुम्ब्रा) – दोपहर 2:16 बजे
प्रथम उम्ब्रा स्पर्श – दोपहर 3:21 बजे
पूर्ण (खग्रास) चरण आरंभ – शाम 4:35 बजे
ग्रहण का मध्य – शाम 5:04 बजे
पूर्ण चरण समाप्त – शाम 5:33 बजे
चंद्रोदय (जयपुर) – शाम 6:28 बजे
जयपुर में दृश्य आंशिक ग्रहण आरंभ – शाम 6:33 बजे
ग्रहण मोक्ष (उम्ब्रा अंत) – शाम 6:46 बजे
पेनुम्ब्रा अंत – शाम 7:52 बजे
जयपुर में स्थानीय दृश्य अवधि लगभग 13 मिनट 36 सेकंड रहेगी। ग्रहण की पूर्णावस्था की कुल अवधि 57 मिनट 27 सेकंड बताई गई है। ग्रहण का परिमाण 1.14 रहेगा।
सूतक काल
चंद्र ग्रहण के कारण जयपुर में सूतक काल सुबह 9:44 बजे से प्रारंभ होकर शाम 6:46 बजे मोक्ष तक प्रभावी रहेगा। परंपरा अनुसार बच्चों, वृद्धों और रोगियों के लिए सूतक का प्रभाव दोपहर 3:34 बजे से माना गया है।
हिन्दू धर्म में चंद्र ग्रहण का महत्व
हिंदू ज्योतिष और धर्मशास्त्र में चंद्र ग्रहण को आध्यात्मिक साधना का विशेष अवसर माना गया है। मान्यता है कि ग्रहण काल में जप, तप, मंत्रसाधना और दान का फल सामान्य दिनों की अपेक्षा कई गुना अधिक प्राप्त होता है।
ज्योतिर्विद महंत योगेश शर्मा के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा पर लगने वाला यह चंद्र ग्रहण सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र से संबंधित प्रभाव उत्पन्न करेगा। ग्रहण काल में चंद्रमा मन का कारक होता है, इसलिए मानसिक स्थिरता, संयम और भगवान के नाम का स्मरण विशेष फलदायी रहेगा। सूतक काल में शुभ कार्य, मूर्ति स्पर्श और भोजन से परहेज करना शास्त्रसम्मत है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार ग्रहण केवल वहीं प्रभावी माना जाता है जहां वह दृश्य हो। जयपुर में चंद्रमा उदय के समय ग्रहण आंशिक रूप से दृश्य रहेगा, इसलिए सूतक और धार्मिक नियमों का पालन किया जाएगा।
क्या करें और क्या न करें
क्या करें :
ग्रहण काल में महामृत्युंजय मंत्र, गायत्री मंत्र या इष्ट मंत्र का जप
गीता, रामायण या विष्णुसहस्रनाम का पाठ
ग्रहण मोक्ष के बाद स्नान और दान
गरीबों को अन्न, वस्त्र और दक्षिणा दान
क्या न करें :
सूतक में भोजन पकाना या करना
पूजा प्रतिमाओं का स्पर्श
शुभ मांगलिक कार्य
गर्भवती महिलाओं का खुले आकाश में अधिक समय तक रहना
परंपरा अनुसार ग्रहण से पूर्व बने भोजन में तुलसी दल या कुश डालकर उसे सुरक्षित माना जाता है।
गलता जी में पवित्र स्नान की परंपरा
जयपुर में ग्रहण मोक्ष के बाद गलता जी तीर्थ में स्नान की विशेष परंपरा रही है। श्रद्धालु सूर्यास्त के पश्चात और अगले दिन प्रातःकाल पवित्र कुंडों में स्नान कर दान-पुण्य करते हैं। मान्यता है कि ग्रहण के बाद पवित्र सरोवर में स्नान करने से नकारात्मक प्रभावों का शमन होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। इसके अतिरिक्त शहर के विभिन्न मंदिरों और घरों में भी ग्रहण समाप्ति के बाद गंगाजल से शुद्धिकरण, धूप-दीप और विशेष आरती की जाती है।
गोविंद देवजी मंदिर में बदलेगा दर्शन समय
ग्रहण के कारण जयपुर स्थित गोविंद देवजी मंदिर में दर्शन व्यवस्था में परिवर्तन किया जाएगा। सूतक प्रारंभ होने से पूर्व नियमित झांकियों के दर्शन होंगे, जबकि ग्रहण काल में पट बंद रखे जाएंगे। मोक्ष के पश्चात शुद्धिकरण के बाद पुनः आरती और दर्शन प्रारंभ होंगे। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से समय-सारणी का पालन करने और अनावश्यक भीड़ से बचने की अपील की है।
वैज्ञानिक दृष्टि से चंद्र ग्रहण
वैज्ञानिक दृष्टि से चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। पूर्ण ग्रहण की अवस्था में चंद्रमा तांबे या लाल रंग का दिखाई देता है, जिसे “ब्लड मून” भी कहा जाता है। यह ग्रहण पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में पूर्ण रूप से दृश्य होगा, जबकि पश्चिमी भारत में चंद्रोदय के समय आंशिक अवस्था दिखाई देगी।
आध्यात्मिक साधना का अवसर
फाल्गुन पूर्णिमा पर लगने वाला यह ग्रहण होली उत्सव से पूर्व आध्यात्मिक चिंतन का अवसर भी प्रदान करेगा। ज्योतिर्विद महंत योगेश शर्मा के अनुसार,
‘ग्रहण काल आत्ममंथन और सकारात्मक संकल्प का समय है। इस अवधि में किए गए मंत्रजाप और दान से मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।’ प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे खगोलीय घटना का आनंद लेते हुए धार्मिक परंपराओं का पालन शांति और संयम के साथ करें।




