नई दिल्ली। UPI Payment पर नए Merchant Discount Rate (MDR) को लेकर बहस तेज हो गई है। इसी बीच BharatPe के पूर्व Co-founder Ashneer Grover ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि भले ही नया शुल्क सीधे ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा, लेकिन कारोबारियों पर बढ़ी लागत का असर आखिरकार उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है। उन्होंने UPI पर लगने वाले इस तरह के शुल्क को ‘Tax’ जैसा बताया है।
दरअसल, National Payments Corporation of India (NPCI) ने तय किया है कि ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) UPI Transactions पर 0.4% MDR लागू होगा। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगी और एक ट्रांजैक्शन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 होगी।
Ashneer Grover ने क्या कहा?
Ashneer Grover ने UPI पर MDR लागू करने के फैसले को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठाए। उनका तर्क है कि यदि Merchant को डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने पर अतिरिक्त लागत देनी पड़ती है, तो कारोबार की कुल लागत बढ़ सकती है और इसका अप्रत्यक्ष असर ग्राहकों पर पड़ने की संभावना रहती है।
हालांकि, मौजूदा नियमों के अनुसार MDR ग्राहक से सीधे वसूल नहीं किया जा सकता। यानी किसी Merchant Payment के दौरान UPI इस्तेमाल करने के लिए ग्राहक से अलग से MDR नहीं लिया जाना है।
₹2,000 से ऊपर UPI Payment पर क्या बदलेगा?
नए नियम केवल चुनिंदा Merchant Transactions पर लागू होंगे। Person-to-Person यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले UPI Payments पर कोई MDR नहीं लगेगा, चाहे रकम कितनी भी हो। वहीं ₹2,000 तक के UPI Merchant Payments भी इस MDR से बाहर रहेंगे।
कुछ विशेष Merchant Categories में ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर अलग व्यवस्था के तहत ₹5 का MDR लागू होगा, जबकि अन्य पात्र Merchant Transactions में 0.4% MDR की व्यवस्था है।
इस तरह फिलहाल UPI इस्तेमाल करने वाले ग्राहक से सीधे कोई अतिरिक्त Transaction Fee नहीं लिया जा रहा है। विवाद मुख्य रूप से इस सवाल पर है कि Merchant पर आने वाली नई लागत का भविष्य में कारोबार और वस्तुओं या सेवाओं की कीमतों पर कितना असर पड़ता है। Grover ने इसी संभावित असर को लेकर चिंता जताई है।



