प्रतीक चौवे, संपादक
राहत के नाम पर बवाल हो गया। टोंक के पूर्व भाजपा सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया ने एक कार्यक्रम के दौरान मुस्लिम महिलाओं से कंबल वापस ले लिए। वीडियो वायरल हुआ तो हंगामा मचना स्वाभाविक है। महिलाओं से कंबल यह कहकर वापस लिए थे कि पीएम मोदी को अपशब्द कहती हैं, इन्हें यहां क्यों बुलाया गया ? धर्म निरपेक्ष देश में इस तरह की सोच वाकई शर्मनाक है। गरीब मुस्लिम महिलाओं का अपमान करना क्या पूर्व सांसद को शोभा देता है? राहत क्या हिंदू-मुस्लिम देखकर की जाती है?
इस मुद्दे पर कांग्रेसी भाजपा नेता को घेर रहे हैं। यही नहीं अब जौनपुरिया को सबक सिखाने के लिए कांग्रेस खुद कंबल बंटवाने का कार्यक्रम करने जा रही है। कंबल वितरण जैसे कार्यक्रम राहत और सेवा की भावना से जुड़े होते हैं। ऐसे में जरुरतमंदों के साथ सार्वजनिक रूप से अपमानजनक व्यवहार हो, तो इसकी निंदा तो होगी ही। यह घटना सामान्य नहीं मानी जा सकती। इसका वीडियो भी वायरल हुआ। दिए हुए कंबल वापस लेकर आखिर पूर्व सांसद क्या जताना चाहते थे? बिना जाने, महिलाओं पर यह आरोप लगा दिए कि वे मोदी को गाली देती हैं, ऐसे में कंबल लेने का कोई अधिकार नहीं है। इससे क्या साबित होता है?
जहां भाजपा सबका साथ-सबका विकास का ध्येय लेकर देश को आगे बढ़ाने का दावा कर रही है वहीं भाजपा के जौनपुरिया हिंदू-मुस्लिम कर रहे हैं। वो अपने उन कार्यकर्ताओं पर भी भड़क गए जिन्होंने इन्हें बुलाया था। मतलब साफ है कि राहत के नाम पर भी राजनीति। कंबल उन्हें क्यों दिया जाए वो उनके वोटर नहीं हैं? कल्याणकारी योजनाएं और राहत कार्यक्रम नागरिक का अधिकार हैं, न कि किसी समुदाय विशेष पर एहसान। यदि सहायता या व्यवहार में भेदभाव का आभास भी पैदा होता है, तो भरोसा कमजोर होता है। यह भी सही है कि आज के दौर में कुछ सेकंड का वीडियो बहुत कुछ तय कर देता है। स्पष्टीकरण अक्सर बाद में आते हैं, लेकिन धारणा पहले ही बन जाती है। यही वजह है कि इस मामले में भी विपक्ष को हमला करने का अवसर मिला।
अब आलम यह है कि भाजपा नेता जौनपुरिया ही नहीं कई अन्य भी सफाई देते फिर रहे हैं। कौन सही है-कौन गलत, यह जनता अपने हिसाब से तय करती है। इंसानियत का धर्म निभाना हम सबकी जिम्मेदारी है। राहत कार्यक्रम सम्मान आधारित होने चाहिए, न कि दया या प्रदर्शन आधारित। गरीब की मदद करते समय उसकी गरिमा सर्वोपरि रहनी चाहिए, चाहे वह किसी भी समुदाय का हो। एहसान न करना चाहें तो भी अपमान तो न करें।




