संपादक : प्रतीक चौवे
Mani Shankar Aiyar Controversy : जयपुर। कांग्रेसी नेता मणिशंकर अय्यर कानोडिया कॉलेज में बुलाए गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई टिप्पणी से विवाद खड़ा हो गया। भाजपा ने इसके लिए विरोध प्रदर्शन तो किया ही, वरिष्ठ नेता डॉ अखिल शुक्ला ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र भेजकर इसके ट्रस्ट की जांच कराने की मांग की। शुक्ला का आरोप यह भी है कि ट्रस्ट की कार्यकारिणी ही फर्जी है। मणिशंकर ने पीएम मोदी के लिए गलत शब्द का इस्तेमाल किया था, इस पर उन्होंने खुद ही बयान जारी कर दिया। अय्यर का कहना था कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं कहा, गलत तरीके से इसे पेश किया जा रहा है। विरोध आगे कितना चलेगा, यह अभी कहा नहीं जा सकता। वैसे इस विरोध में आमजन का कोई हित भी नहीं दिख रहा। वैसे सही तरीके से देखा जाए तो यह कांग्रेस-बनाम भाजपा का मुद्दा है।
कानोडिया कॉलेज में अय्यर को बुलाने पर विवाद, भाजपा ने ट्रस्ट जांच की उठाई मांग
अय्यर ने कुछ गलत कहा या नहीं, उनके बुलाए जाने को लेकर कार्यकारिणी पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं? अय्यर को बुलाए जाने के पीछे क्या हित हो सकता है, यह कहा नहीं जा सकता। यह जरूर दिख रहा है कि भाजपा शासित राज्य में विपक्षी दल के नेता को बुलाया जाना भी विवाद का विषय हो सकता है। खैर, अय्यर का सफाई देना अपनी जगह ठीक है तो सीएम से ट्रस्ट की जांच कराने की मांग को भी उचित माना जा सकता है। कार्यकारिणी ‘ कांग्रेसी’ मानसकिता की है, या फिर अय्यर को बुलाए जाने के पीछे नीयत साफ नहीं थी, इस पर भी अभी साफ-सफाई आना बाकी है।
कानोडिया कॉलेज कार्यक्रम बना राजनीतिक मुद्दा
अभी दो दिन पहले कांग्रेसी नेता दिल्ली यूनिवर्सिटी पर दिए गए एक बयान से विवादों में आ गए। राहुल का कहना था कि यहां कोई भी इंटरव्यू देने आता है तो पहले उसकी जाति पूछी जाती है और इस आधार पर फेल कर दिया जाता है। इस पर दिल्ली यूनिवर्सिटी ने बयान देकर खुद को पाक-साफ बताया और कहा कि यह झूठ है। यहां कॉनोडिया कॉलेज ट्रस्ट की ओर से फिलहाल कोई सफाई नहीं आई है। वैसे अय्यर को बुलाना कोई अपराध नहीं है, यह अलग बात है कि यहां भी किसी का ईगो हर्ट हुआ हो तो कुछ कहा नहीं जा सकता। यह सही है कि कॉलेज ट्रस्ट की जांच होनी चाहिए। और फिर कॉनोडिया की ही क्यों, अन्य कॉलेजों की क्यों नहीं।
जयपुर ही नहीं पूरे प्रदेश में अनेक कॉलेजों के ट्रस्ट की भी होनी चाहिए। क्या नियम माने जा रहे हैं या यहां भी घपलेबाजी की जा रही है। वैसे बयानबाजी को तूल देकर बड़ा विवाद खड़ा करने से जनता का कोई फायदा नहीं होता। जनहित के मुद्दे कौन उठा रहा है, उसकी पीड़ा के लिए सड़कों पर कौन आ रहा है, इसे महत्वपूर्ण माना जाना चाहिए। बात गैस की महंगाई अथवा किल्लत की हो या फिर अन्य ज्वलंत मुद्दों की, जनता का पक्ष भी तो देखा जाना चाहिए। इसके विरोध को बेकार बताना या फिर राजनीति करने की बात कहना भी शोभा नहीं देता।
जनहित के मुद्दों पर विरोध हो, वो भी शालीन तरीके से। इसके लिए कांग्रेस के साथ अन्य दल भी आए। पूरे प्रदेश में गैस किल्लत को लेकर विरोध चल रहा है और जनता परेशानी भुगत रही है। सरकार अपना पक्ष रख रही है तो विपक्ष उसकी मुखालफत कर रहा है। विरोध करना सबका अधिकार है, वो अय्यर का हो या फिर अन्य नेता का। पर उनके बुलाए जाने को राजनीति के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। ट्रस्ट की कार्यकारिणी क्या घपले कर रही है, उसकी जांच हो पर उसने अय्यर को बुला लिया-यह जांच की जाए तो ठीक नहीं है। कॉलेज ने उन्हें बुलाया और उन्होंने क्या कहा, इस पर भी चिंतन होना चाहिए। पीएम पर की गई गलत टिप्पणी का भी विरोध हो और कॉलेजों के ट्रस्टों की गड़बड़ी भी जांची जाए।




