US Iran Conflict 2026 : वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा कि अमेरिकी सेना ईरान में जल्द ही ‘‘काम खत्म कर देगी क्योंकि मुख्य रणनीतिक उद्देश्य पूरे होने वाले हैं।’’ ट्रंप ने इजराइल के साथ मिलकर ईरान पर हमले करने के करीब एक महीने बाद राष्ट्र के नाम अपने पहले संबोधन में अपने इस कदम का बचाव किया। अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर 28 फरवरी, 2026 को पहली बार हमला किया था जिसके बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की और पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू हो गया।

हमारी सेना मिशन खत्म करने के बेहद करीब : ट्रंप
ट्रंप ने ईरान के खिलाफ हमलों के संदर्भ में कहा, ‘‘अगले दो से तीन सप्ताह में हम उन पर बेहद कड़ा प्रहार करेंगे। हम उन्हें पाषाण युग में भेज देंगे, जहां उन्हें वास्तव में होना चाहिए।’’ ट्रंप ने लगभग 20 मिनट के इस संबोधन में हाल के हफ्तों में कही गई अपनी कई बातों को दोहराया। जनमत सर्वेक्षणों के अनुसार, कई अमेरिकी मानते हैं कि अमेरिका की सेना ने ईरान में जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप किया है। पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण गैस एवं तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। ऐसे में ट्रंप के इस भाषण से जनभावना में कोई खास बदलाव आने की संभावना नहीं लगती।
ट्रंप के बयान का वैश्विक वित्तीय बाजारों पर तत्काल असर दिखा। ईरान पर अमेरिका के कड़े हमले जारी रखने संबंधी ट्रंप की टिप्पणियों के बाद तेल की कीमतों में चार प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई और एशियाई शेयर बाजार गिर गए। ट्रंप ने कहा, ‘‘मुझे आज रात यह कहते हुए खुशी हो रही है कि मुख्य रणनीतिक उद्देश्य लगभग पूरे होने वाले हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम काम खत्म करने वाले हैं और हम इसे बहुत तेजी से पूरा करेंगे। हम बहुत करीब पहुंच चुके हैं।’’ राष्ट्रपति ने ईरान में अमेरिकी जमीनी सैन्य बल भेजने की संभावना का जिक्र नहीं किया और ना ही उन्होंने उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) का उल्लेख किया जबकि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित रखने के मामले में मदद नहीं करने पर नाटो सहयोगियों की आलोचना करते रहे हैं। उन्होंने ईरान के साथ बातचीत के बारे में भी कुछ नहीं कहा और न ही इस जलमार्ग को खोलने के लिए उनके द्वारा ईरान को दी गई छह अप्रैल की समयसीमा का जिक्र किया।
ट्रंप ने कहा, ‘‘प्रथम विश्व युद्ध एक साल, सात महीने और पांच दिन चला था। द्वितीय विश्व युद्ध तीन साल, आठ महीने और 25 दिन तक जारी रहा था।” उन्होंने कहा कि तुलनात्मक रूप से ईरान में कार्रवाई 32 दिन तक चली है, और यह ‘‘इतनी शक्तिशाली, इतनी शानदार’’ रही है कि ‘‘सबसे शक्तिशाली देशों में शामिल देश अब वास्तव में कोई खतरा नहीं है।’’ ट्रंप ने कहा, ‘‘पिछले सप्ताह हमारे सशस्त्र सैन्य बलों ने युद्धक्षेत्र में कई तेज, निर्णायक और जबरदस्त जीत हासिल की हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘बी-2 बमवर्षक विमानों से जिन परमाणु ठिकानों को हमने ध्वस्त किया, उन पर इतना भीषण प्रहार हुआ है कि परमाणु धूल के पास पहुंचने में भी महीनों लग जाएंगे। हम उन पर उपग्रहों के जरिए कड़ी निगरानी और नियंत्रण रखे हुए हैं। अगर हमें वे कोई भी कदम उठाते दिखे तो हम उन पर फिर से मिसाइलों से जोरदार हमला करेंगे।’’
ईरान की सैन्य ताकत कमजोर, रणनीतिक लक्ष्य लगभग पूरे : ट्रंप
ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका के लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है और ये लक्ष्य हैं ईरान की मिसाइल उत्पादन क्षमता एवं नौसेना को नष्ट करना तथा यह सुनिश्चित करना कि उसके लिए काम करने वाले छद्म संगठन अब क्षेत्र को अस्थिर नहीं कर सकें और ईरान परमाणु हथियार नहीं बना सके। ट्रंप ने कहा कि यह सैन्य कार्रवाई तेल समेत ईरान के किसी विशाल संसाधन को हासिल करने के लिए नहीं की गई है, बल्कि यह अमेरिका के सहयोगियों की मदद के लिए की गई है। उन्होंने कहा, ‘‘हम पश्चिम एशिया से पूरी तरह अलग हैं लेकिन फिर भी हम मदद करने के लिए वहां हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमें वहां रहने की जरूरत नहीं है। हमें उनके तेल की जरूरत नहीं है। उनके पास जो कुछ भी है, उसकी हमें जरूरत नहीं है लेकिन हम अपने सहयोगियों की मदद करने के लिए वहां हैं।’’
ट्रंप ने अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ के क्रॉस हॉल में बुधवार रात कहा कि पिछले एक महीने में ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ की कार्रवाई से ईरान की ‘‘मिसाइल और ड्रोन दागने की क्षमता में उल्लेखनीय कमी आई है और हथियार बनाने वाली उसकी फैक्टरी एवं रॉकेट प्रक्षेपक तहस-नहस किए जा रहे हैं।’’ ट्रंप ने कहा कि ईरान की ‘‘नौसेना खत्म हो चुकी है, उसकी वायु सेना तबाह हो चुकी है और उस देश के नेता ‘‘अब मारे जा चुके हैं।’’ उन्होंने यह भी कहा कि इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को ‘‘इस वक्त हमारी कार्रवाई में बुरी तरह तबाह किया जा रहा है।’’



