Monday, February 23, 2026
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Chhattisgarh grave dispute case : सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के गांवों में आदिवासी ईसाइयों के शवों को कब्र से निकालने पर रोक लगाई

उच्चतम न्यायालय ने छत्तीसगढ़ में आदिवासी ईसाइयों के शव कब्र से निकालने के आरोपों पर राज्य सरकार से जवाब मांगा और ऐसी कार्रवाई पर रोक लगा दी। याचिका में दावा किया गया कि मृतकों को गांवों के कब्रिस्तानों में दफनाने से रोका जा रहा है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। अदालत ने मामले की सुनवाई चार सप्ताह बाद तय की।

Chhattisgarh grave dispute case : नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को छत्तीसगढ़ सरकार से उस याचिका पर जवाब मांगा जिसमें आरोप लगाया गया है कि वहां के गांवों में आदिवासी ईसाइयों के शवों को जबरन कब्र से निकाला गया और फिर से दफनाया गया। अदालत ने आगे शव निकालने पर रोक भी लगा दी। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया, जिसमें दावा किया गया था कि छत्तीसगढ़ में आदिवासी ईसाइयों को उनके गांवों में स्थित कब्रिस्तानों में अपने मृत परिवार के सदस्यों को दफनाने से रोका जा रहा है।

‘छत्तीसगढ़ एसोसिएशन फॉर जस्टिस एंड इक्वैलिटी’ और अन्य द्वारा अधिवक्ता सत्य मित्रा के माध्यम से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंसाल्वेस ने कहा कि याचिकाकर्ताओं में से एक की मां के शव को उनकी जानकारी के बिना कब्र से निकालकर कहीं और दफना दिया गया। एक अन्य याचिकाकर्ता के पति के शव को भी बहुसंख्यक समुदाय के ग्रामीणों द्वारा जबरन कब्र से निकाला गया और दूर किसी स्थान पर फिर से दफना दिया गया।पीठ द्वारा राज्य सरकार को नोटिस जारी करने के बाद, गोंसाल्वेस ने अदालत से कब्रों से शवों को जबरन हटाने की किसी भी कार्रवाई पर रोक लगाने का आग्रह किया।

पीठ ने आगे किसी भी शव को कब्र से निकालने पर रोक लगा दी और मामले की सुनवाई चार सप्ताह बाद के लिए स्थगित कर दी। याचिका में कहा गया, संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर यह याचिका आदिवासी ईसाईयों के संबंध में है, जिन्हें अन्य सभी समुदायों की तरह अपने गांवों की सीमाओं के भीतर स्थित कब्रिस्तानों में अपने मृतकों को दफनाने से जबरन रोका जा रहा है। याचिका में राज्य और व्यक्तियों को अंतिम संस्कार में हस्तक्षेप करने से रोकने को लेकर निर्देश देने का अनुरोध किया गया। याचिका में यह भी अनुरोध किया गया है कि सभी व्यक्तियों को, चाहे उनकी जाति, धर्म या एससी/एसटी/ओबीसी स्थिति कुछ भी हो, अपने मृतक को उसी गांव में दफनाने की अनुमति दी जाए जहां वे रहते हैं।

याचिका में राज्य की सभी ग्राम पंचायतों को यह निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है कि वे प्रत्येक गांव में सभी समुदायों के लिए, दफनाने के लिए विशिष्ट क्षेत्र निर्धारित करें और सभी परिवारों को अपने मृतक को उसी गांव में दफनाने की अनुमति दें जहां वे रहते हैं। याचिका में आरोप लगाया गया कि मौलिक अधिकारों की रक्षा करने के बजाय, सरकार ने सांप्रदायिक तत्वों के गैरकानूनी कृत्यों को अनुमति दी है और उन्हें बढ़ावा भी दिया है, जो धर्म के नाम पर शवों को खोदते हैं, अंतिम संस्कार में बाधा डालते हैं और परिवारों को डराते-धमकाते हैं।

Mukesh Kumar
Mukesh Kumarhttps://jagoindiajago.news/
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