Sunday, January 4, 2026
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Gandhi Talks : विजय सेतुपति-अदिति राव हैदरी की फिल्म ‘गांधी टॉक्स’ इस दिन होगी सिनेमाघरों में रिलीज, नया टीजर किया गया रिवील

विजय सेतुपति और अदिति राव हैदरी की फिल्म ‘गांधी टॉक्स’ 30 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। किशोर बेलेकर के निर्देशन में बनी यह जी स्टूडियोज की फिल्म आधुनिक भारतीय सिनेमा की एक दुर्लभ मूक कृति है, जिसमें संवाद के बजाय मौन के जरिए कहानी कही गई है।

Gandhi Talks : नई दिल्ली। विजय सेतुपति और अदिति राव हैदरी अभिनीत फिल्म ‘गांधी टॉक्स’ 30 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। निर्माताओं ने शनिवार को यह जानकारी दी। एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, किशोर बेलेकर द्वारा निर्देशित, जी स्टूडियोज की यह फिल्म आधुनिक भारतीय सिनेमा में एक दुर्लभ मूक कृति है, जिसमें मौन ही कहानी कहने का सबसे सशक्त माध्यम है।

बेलेकर ने कहा कि यह फिल्म ‘‘मौन पर भरोसा’’ करने के बारे में है। उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘भारतीय सिनेमा ने कहानी कहने के एक सदी से अधिक समय का सफर तय कर लिया है, ऐसे में हम इस माध्यम के सबसे मौलिक रूप – विशुद्ध प्रदर्शन और भावना की ओर लौटना चाहते थे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘कलाकारों ने उस संवेदनशीलता को पूरी तरह से अपनाया और ए आर रहमान का संगीत फिल्म की आवाज बन गया।

जी स्टूडियोज और मीरा चोपड़ा के सहयोग से हम सिनेमा का एक साहसिक और ईमानदार नमूना पेश करने में सक्षम हुए।’’ फिल्म में अरविंद स्वामी और सिद्धार्थ जाधव भी मुख्य भूमिका में हैं और इसका संगीत ए आर रहमान ने तैयार किया है।

कॉमेडी फिल्म है गांधी टॉक्स

गांधी टॉक्स एक साइलेंट ब्लैक कॉमेडी है, जो एक किरदार की आर्थिक ज़रूरतों और उसके आसपास के लोगों पर पड़ने वाले प्रभाव को दिखाती है। यह महादेव की कहानी है, जो एक युवा, बेरोजगार स्नातक है और किसी भी तरह नौकरी पाने के लिए बेताब है। उसकी मुलाकात एक व्यापारी और एक छोटे-मोटे चोर से होती है। इस कहानी में खामोशी शब्दों से कहीं ज़्यादा बोलती है।

गांधी टॉक्स फिल्म नोटों पर छपी गांधी की छवि और गांधी के उन आदर्शों के बीच के विरोधाभास को उजागर करती है जिन्हें हर कोई अपनाना चाहता है। विजय सेतुपति ने IFFI 2023 में फिल्म के बारे में बात करते हुए कहा, “न्याय वास्तविकता से भिन्न होता है। शुरुआत में नायक नोटों पर छपी गांधी की छवि पर प्रतिक्रिया करता है, लेकिन बाद में वह अपने हृदय में बसे गांधी (गांधी के आदर्शों) पर प्रतिक्रिया करने लगता है। यही वह विरोधाभास है जिसे फिल्म दर्शाती है।”

जब उनसे पूछा गया कि क्या मूक फिल्म में अभिनय करना कठिन था, तो अभिनेता ने कहा कि संवादों की मौजूदगी से उनके अभिनय पर कोई असर नहीं पड़ता। उन्होंने आगे कहा, “मैं कला से आशीर्वाद और दर्शकों को प्रभावित करने की उम्मीद करता हूं। किसी भी प्रकार के सिनेमा में सफलता और असफलता का जोखिम हमेशा रहता है। घबराहट के साथ जीना इस पेशे का हिस्सा है।”

Mukesh Kumar
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