नयी दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर संसद के प्रस्तावित विशेष सत्र के समय पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि राज्यों में जारी चुनावों के बीच इस तरह का सत्र बुलाना यह संकेत देता है कि सरकार महिला आरक्षण कानून को राजनीतिक दृष्टि से जल्द लागू करने की कोशिश कर रही है।
खरगे ने अपने पत्र में यह भी आग्रह किया कि परिसीमन के मुद्दे पर स्पष्टता लाने के लिए 29 अप्रैल के बाद सभी दलों की बैठक बुलाई जानी चाहिए। उनका मानना है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम से जुड़े प्रावधानों को परिसीमन प्रक्रिया से जोड़कर देखा जा रहा है, ऐसे में इस विषय पर विस्तृत चर्चा जरूरी है।
यह प्रतिक्रिया प्रधानमंत्री द्वारा भेजे गए उस पत्र के जवाब में आई है, जिसमें 16 अप्रैल से इस कानून पर विचार के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की जानकारी दी गई थी। राज्यसभा में विपक्ष के नेता खरगे ने कहा कि यह कानून पहले ही संसद से सर्वसम्मति से पारित हो चुका है और उस समय कांग्रेस ने इसके तत्काल लागू होने की मांग भी उठाई थी।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार अब तक इस कानून को लागू करने में देरी करती रही है, जबकि पहले व्यापक सहमति का हवाला दिया गया था। ऐसे में अचानक विशेष सत्र बुलाने का फैसला कई सवाल खड़े करता है। खरगे ने जोर देकर कहा कि परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर बिना जानकारी साझा किए किसी सार्थक चर्चा की उम्मीद करना मुश्किल है।
उनका कहना है कि सभी संबंधित पहलुओं पर पारदर्शिता और संवाद के बिना इस ऐतिहासिक कानून पर आगे बढ़ना उचित नहीं होगा। कुल मिलाकर, कांग्रेस ने सरकार से आग्रह किया है कि वह इस मुद्दे पर सभी दलों को विश्वास में लेकर आगे बढ़े, ताकि व्यापक सहमति के साथ निर्णय लिया जा सके।



