Monday, July 13, 2026
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अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की नजर, SIT से मांगी रिपोर्ट, CBI जांच की मांग पर सुनवाई

राम मंदिर चढ़ावा कथित गबन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी से स्टेटस रिपोर्ट मांगी और ट्रस्ट को नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ताओं ने सीबीआई जांच, फॉरेंसिक ऑडिट और कैग से लेखा परीक्षण की मांग की है। उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी गठित की थी।

Ram Mandir Donation Case : नई दिल्ली। अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे के कथित गबन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार की गठित एसआईटी को स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने मामले की जांच की प्रगति पर विस्तृत जानकारी मांगी है। भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में निष्पक्ष और समयबद्ध जांच के अनुरोध वाली याचिकाओं पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भी नोटिस जारी किया।

सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी से रिपोर्ट तलब की

तीन याचिकाकर्ताओं में से एक नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराने का अनुरोध करते हुए उच्चतम न्यायालय का रुख किया। उन्होंने राम मंदिर का प्रबंधन करने वाले श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन का भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) से ऑडिट कराने का भी अनुरोध किया। अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव ने भी इसी प्रकार के अनुरोधों वाली दूसरी याचिका दायर की है। वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह द्वारा दायर तीसरी याचिका में उच्चतम न्यायालय की निगरानी में सीबीआई जांच के साथ-साथ ट्रस्ट के पूरे वित्तीय लेन-देन का फॉरेंसिक ऑडिट कराने का अनुरोध किया गया है। इससे पहले न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना की अध्यक्षता वाली अवकाशकालीन पीठ ने एक याचिकाकर्ता को मामले को शीघ्र सुनवाई के लिए बाद में उल्लेख करने की अनुमति दी थी।

चढ़ावा विवाद पर न्यायालय ने दिखाई सख्ती

अधिवक्ता अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि मंदिर ट्रस्ट के कामकाज, प्रशासन और कथित वित्तीय अनियमितताओं सहित अन्य कथित अवैधताओं की जांच के लिए सीबीआई के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया जाना चाहिए। याचिका में राय ने केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और ट्रस्ट को ऐसे नियामक, पर्यवेक्षी और ऑडिट तंत्र स्थापित एवं लागू करने का निर्देश देने का अनुरोध किया है, जो जनहित की रक्षा कर सकें और करोड़ों श्रद्धालुओं तथा दानदाताओं का विश्वास बनाए रखें।

याचिका में कहा गया है कि ट्रस्ट से जुड़े धन के गायब होने और अन्य कथित अनियमितताओं की खबरें अंततः सही साबित हों या नहीं, लेकिन इन रिपोर्टों ने अयोध्या की गरिमा की पुनर्स्थापना के लिए पीढ़ियों तक संघर्ष करने वाले लोगों में गहरी चिंता पैदा की है। याचिका में यह भी कहा गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी ने इस मामले में प्राथमिकी या किसी नियमित आपराधिक मुकदमे के दर्ज किए बिना ही जांच शुरू कर दी।

याचिका के अनुसार, यह मामला केवल संज्ञेय अपराधों की संभावित जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे असंख्य श्रद्धालुओं और आम जनता की आस्था, भावनाएं तथा विश्वास भी सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। उल्लेखनीय है कि 13 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन के आरोपों के बाद मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी का गठन किया था। इस एसआईटी में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) किरण एस तथा विशेष सचिव (वित्त) नील रतन को शामिल किया गया है।

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Mukesh Kumar
Mukesh Kumarhttps://jagoindiajago.news/
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