Thursday, January 29, 2026
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Rajasthan : ‘मिड डे मील’ योजना में 2000 करोड़ से अधिक का घोटाला, 21 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज, ACB ने किया बड़ा खुलासा

राजस्थान एसीबी ने कोविड-19 के दौरान ‘मिड डे मील’ योजना में 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की कथित गड़बड़ियों के मामले में कॉनफैड और निजी कंपनियों के अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जांच में आरोप है कि नियमों में बदलाव कर चहेती फर्मों को टेंडर दिए गए, फर्जी आपूर्ति व बिलों के जरिए सरकारी भुगतान लिया गया, जिससे राज्य को भारी वित्तीय नुकसान हुआ।

Rajasthan News : जयपुर। राजस्थान के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौरान राज्य में ‘मिड डे मील’ योजना के अंतर्गत स्कूली विद्यार्थियों को खाद्यान्न उपलब्ध कराने में 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की कथित गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार के आरोप में ‘कॉनफैड’ और निजी कंपनियों के कई अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

ACB ने किया बड़ा खुलासा

अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, ‘मिड डे मील’ योजना में 2000 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला उजागर होने के बाद राजस्थान राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ लिमिटेड (कॉनफैड) व निजी फर्मों के 21 लोगों को नामजद करते हुए एसीबी में मामला दर्ज किया गया है। ब्यूरो द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौरान विद्यालय बंद रहने की अवधि में राज्य सरकार द्वारा संचालित योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों को खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए ‘कॉनफैड’ के माध्यम से दाल, तेल, मसाले आदि से युक्त ‘कॉम्बो पैक’ की आपूर्ति की गई थी।

2000 करोड़ रुपये का सीधा वित्तीय नुकसान

इस सामग्री को एफएसएसएआई एवं एगमार्क मानकों के अनुरूप बताते हुए राज्य के विद्यालयों तक ‘डोर-स्टेप डिलीवरी’ किए जाने का दावा किया गया था। इस योजना के क्रियान्वयन में भारी अनियमितताओं एवं भ्रष्टाचार की शिकायतें प्राप्त होने पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने प्राथमिक जांच दर्ज की। बयान के मुताबिक, मामले की जांच में यह तथ्य सामने आए कि ‘मिड डे मील’ योजना से जुड़े अधिकारियों एवं ‘कॉनफैड’ के अधिकारियों ने मिलीभगत कर पूर्वक नियमों में बदलाव किए, जिसके परिणामस्वरूप पात्र एवं योग्य फर्मों को टेंडर प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया और अपनी चहेती फर्मों को अनुचित लाभ पहुंचाते हुए निविदा आवंटित की गयीं। बयान में बताया गया कि इन कंपनियों ने फर्जी आपूर्तिकर्ताओं एवं ट्रांसपोर्टरों का एक संगठित नेटवर्क खड़ा किया।

बयान के मुताबिक, जांच में यह भी पाया गया कि कई मामलों में वास्तविक रूप से माल की खरीद एवं आपूर्ति किए बिना ही अधिक दरों के फर्जी बिल प्रस्तुत किए गए और उन्हीं के आधार पर सरकारी भुगतान प्राप्त कर लिया गया। एसीबी ने बताया कि इस प्रकार सुनियोजित धोखाधड़ी से राज्य राजकोष को करीब 2000 करोड़ रुपये का सीधा वित्तीय नुकसान पहुंचा। जांच एजेंसी ने बताया कि मामले में संलिप्तता पाए जाने पर योजना की अवधि के दौरान पदस्थापित निम्नलिखित व्यक्तियों एवं संस्थाओं के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया।

Mukesh Kumar
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