Monday, February 23, 2026
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India AI Impact Summit 2026 : मोदी ने एआई के लिए ‘मानव विजन’ का अनावरण किया, प्रौद्योगिकी पर मानव नियंत्रण की वकालत की

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘मानव विजन’ पेश करते हुए कहा कि एआई सभी के लिए सुलभ, समावेशी और मानव-केंद्रित होना चाहिए। उन्होंने खुला और साझा एआई मॉडल की वकालत करते हुए कहा कि भारत इस तकनीक से डरता नहीं, बल्कि इसे समृद्धि, नवाचार और वैश्विक कल्याण का बड़ा अवसर मानता है तथा जिम्मेदार उपयोग से मानवता के भविष्य को सुरक्षित बनाने पर जोर दिया।

India AI Impact Summit 2026 : नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की पहुंच सभी तक सुनिश्चित किए जाने की वकालत करते हुए बृहस्पतिवार को ‘मानव विजन’ का अनावरण किया जिसके तहत संप्रभुता और समावेशिता पर विशेष जोर देते हुए तेजी से उभरती इस प्रौद्योगिकी के उपयोग एवं मानव-केंद्रित दृष्टिकोण को अपनाने की परिकल्पना की गई है। प्रधानमंत्री ने यहां ‘एआई इम्पैक्ट’ शिखर सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि भारत का मानना ​​है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता दुनिया की भलाई के लिए वास्तव में तभी काम आएगी जब इसे साझा किया जाएगा और इसके कोड सार्वजनिक होंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश एआई से डरता नहीं है बल्कि इसमें भविष्य की संभावनाएं देखता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सभी का कल्याण और खुशहाली एआई के लिए ‘‘हमारा मापदंड’’ है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मनुष्य महज ‘डेटा’ बिंदु या कच्चा माल न बनकर रह जाएं।

खुला और सुलभ AI ही बनेगा दुनिया का भविष्य: मोदी

मोदी ने कहा, मैं एआई के लिए ‘मानव’ (एमएएनएवी) दृष्टिकोण प्रस्तुत करता हूं जिसमें ‘एम’ का अर्थ ‘मोरल एंड इथिकल सिस्टम्स’ (नैतिक एवं नीतिपरक प्रणालियां), ‘ए’ से तात्पर्य ‘अकाउंटेबल गर्वनेंस’ (जवाबदेह शासन), ‘एन’ से तात्पर्य ‘नेशनल सॉवेरिनिटी’ (राष्ट्रीय संप्रभुता), ‘ए’ से तात्पर्य ‘एक्सेसबल इंड इन्क्लूसिव’ (सुलभ और समावेशी) और ‘वी’ से तात्पर्य ‘वैलिड एंड लेजिटिमेट’ (वैध और कानूनी) है। इस शिखर सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा, स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गी पॉहमेलॉ सहित दुनिया भर के नेता और कई प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) उपस्थित थे। मोदी ने कहा कि भारत का ‘मानव’ दृष्टिकोण 21वीं सदी की एआई-संचालित दुनिया में मानवता के कल्याण के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा। मोदी ने कहा, ‘‘हमें एआई को खुला आकाश देना है, लेकिन साथ ही लगाम अपने हाथ में रखनी है।’’ प्रधानमंत्री ने जीपीएस का उदाहरण देते हुए कहा कि यह उपकरण दिशाओं के बारे में सुझाव देता है लेकिन अंतिम निर्णय उपयोगकर्ता का ही होता है। मोदी ने कहा, ‘‘मानवता आज एआई को जिस दिशा में ले जाएगी, उसी से हमारा भविष्य तय होगा।’’ उन्होंने बच्चों की सुरक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि एआई का क्षेत्र बच्चों के लिए सुरक्षित होना चाहिए और परिवार के मार्गदर्शन में इसका इस्तेमाल होना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज दुनिया में दो तरह के लोग हैं- एक वे जो एआई में डर देखते हैं और दूसरे वे जो एआई में समृद्धि देखते हैं। उन्होंने कहा, मैं गर्व और जिम्मेदारी के साथ कहता हूं कि हमें इसमें डर नहीं दिखता। भारत एआई में समृद्धि देखता है, भारत एआई में भविष्य देखता है। भारत एआई में प्रतिभा, ऊर्जा क्षमता और नीतिगत स्पष्टता के साथ अवसर और आने वाले कल की रूपरेखा देखता है। उन्होंने कहा, हमारे पास प्रतिभा भी है। हमारे पास ऊर्जा क्षमता और नीतिगत स्पष्टता भी है। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि इस शिखर सम्मेलन में भारत की तीन कंपनियों ने अपने एआई मॉडल और ऐप्लिकेशन पेश किए हैं। ये मॉडल हमारे युवाओं की प्रतिभा को दर्शाते हैं। ये उन समाधानों को भी दिखाते हैं जो भारत दुनिया को दे रहा है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव इतिहास में एक परिवर्तनकारी अध्याय

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘एआई हमारे तंत्रों को अधिक स्मार्ट, अधिक दक्ष और अधिक प्रभावी बनाएगा। यह लोगों के लिए रचनात्मक भूमिकाएं अपनाने के और अवसर खोलेगा। यह नवोन्मेष, उद्यमिता और नये उद्योगों के सृजन का बड़ा अवसर है।’’ मोदी ने कहा, ‘‘कुछ देशों का मानना है कि एआई को गोपनीय और बंद तरीके से विकसित किया जाना चाहिए लेकिन भारत अलग है। हमारा मानना ​​है कि एआई सही मायने में दुनिया के हित में तभी काम करेगा जब इसे साझा किया जाएगा और इसके कोड सार्वजनिक होंगे। तभी लाखों युवा दिमाग इसे और बेहतर बना पाएंगे।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि यह प्रदर्शनी भारत में हो रही है, जो मानवता के छठे हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है, जहां दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है और जो प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रतिभा के सबसे बड़े भंडार का केंद्र है। उन्होंने कहा, ‘‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव इतिहास में एक परिवर्तनकारी अध्याय है। भारत एआई क्रांति का केवल हिस्सा नहीं है, बल्कि वह इसका नेतृत्व कर रहा है और इसे आकार भी दे रहा है।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत न केवल प्रौद्योगिकी बनाता है बल्कि उसे अभूतपूर्व गति से अपनाता भी है। उन्होंने कहा, ‘‘कुछ लोगों को नयी प्रौद्योगिकी को लेकर संदेह है लेकिन युवा पीढ़ी एआई को जिस तरह अपना रही है, वह अभूतपूर्व है। एआई शिखर सम्मेलन की प्रदर्शनी को लेकर भी यहां जबरदस्त उत्साह रहा है।’’ प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘मानव इतिहास में कुछ ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ रहे हैं जिन्होंने सदियों को आकार दिया है। इन मोड़ ने सभ्यता की दिशा तय की और विकास की रफ्तार को बदल दिया। कृत्रिम बुद्धिमत्ता इतिहास में ऐसा ही एक परिवर्तन है।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत नयी प्रौद्योगिकी बनाता भी है और इसे तेजी से अपनाता भी है, लेकिन असल सवाल यह नहीं है कि एआई भविष्य में क्या कर सकता है, बल्कि ‘‘वास्तविक प्रश्न यह है कि हम वर्तमान में एआई का उपयोग कैसे कर सकते हैं।’’ उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता बदलाव लाने वाली शक्ति है, यदि यह अपने लक्ष्यों से भटक जाती है तो यह विनाश का कारण बनेगी और यदि इसका सही उपयोग किया जाए तो यह समाधान प्रदान करेगी। उन्होंने कहा, ‘‘एआई के लिए हमारा मापदंड सभी का कल्याण और खुशहाली है। हमें यह सुनिश्चित करने के लिए एआई को सभी तक पहुंचाना होगा कि मनुष्य महज डेटा बिंदु या कच्चा माल न बनकर रह जाए। हमें एआई को खुला आकाश देना है, लेकिन साथ ही लगाम अपने हाथ में रखनी है।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि एआई मशीनों को बुद्धिमान बना रही है और साथ ही यह मानवीय क्षमताओं को कई गुना बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि एआई पर भारत का दृष्टिकोण इस शिखर सम्मेलन की विषय-वस्तु में परिलक्षित होता है, जो सभी का कल्याण और खुशहाली है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘मशीन लर्निंग’ से ‘लर्निंग मशीन’ तक की वर्तमान यात्रा न केवल तेज है, बल्कि गहन एवं व्यापक भी है। उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए, हमें अपना दृष्टिकोण व्यापक रखना चाहिए और उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी के साथ इसे निभाना चाहिए। वर्तमान पीढ़ी के साथ-साथ हमें इस बात की भी चिंता करनी चाहिए कि हम भावी पीढ़ियों को एआई का कौन सा स्वरूप सौंपेंगे।’’ प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘इसे खासकर ‘ग्लोबल साउथ’ में समावेशिता तथा सशक्तीकरण का साधन बनाया जाना चाहिए।’’ ‘ग्लोबल साउथ’ से तात्पर्य उन देशों से है जिन्हें अक्सर विकासशील, अल्प विकसित अथवा अविकसित माना जाता है और ये मुख्य रूप से अफ्रीका, एशिया एवं लातिन अमेरिका में स्थित हैं। इस कार्यक्रम में श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके, भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे, मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम, क्रोएशिया के प्रधानमंत्री आंद्रेई प्लेनकोविक, सर्बिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक, सेशेल्स के उपराष्ट्रपति सेबेस्टियन पिल्ले, एस्टोनिया के राष्ट्रपति अलार कारिस और फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो भी शामिल हुए।

Mukesh Kumar
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