Padma Awards 2026: केंद्र सरकार ने पद्म पुरस्कारों का ऐलान कर दिया है. इस सूची में राजस्थान की 3 हस्तियों के नाम भी शामिल हैं. इनमें प्रसिद्ध भपंग वादक गफरुद्दीन मेवाती जोगी, अलगोजा वादक तगा राम भील और ब्रह्मदेव महाराज को पद्मश्री से सम्मानित करने का ऐलान किया गया है. राजस्थान के डीग जिले से संबंध रखने वाले मेवाती को इससे पहले भी कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।
कौन हैं गफरुद्दीन मेवाती जोगी ?
मेवाती लोक संगीत, खास तौर पर ‘पांडुन का कड़ा’ और भपंग वादन की परंपरा को संरक्षित और जीवंत बनाए रखने में उनका योगदान बेजोड़ माना जाता है। उन्हें भपंग वादन में विशेष दक्षता हासिल है। उन्होंने देश और विदेश में अनेक मंचों पर भपंग वादन और ‘पांडुन का कड़ा’ की प्रस्तुतियां दी हैं। उन्हें ‘पांडुन का कड़ा’ के 2500 से अधिक दोहे कंठस्थ हैं।
#WATCH | अलवर, राजस्थान: लोक कलाकार गफरुद्दीन मेवाती को पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
— ANI_HindiNews (@AHindinews) January 25, 2026
उन्होंने कहा, "मुझे बहुत खुशी हुई। मेरे जीवन का जो संघर्ष था, उसका आज परिणाम मुझे मिला है। मैंने गांव-गांव जाकर अपने पिता के साथ इस कला को सीखा और उसे आगे बढ़ाया… मेरी आठवीं पीढ़ी… pic.twitter.com/CO0GkNxWxT
मेवाती का जन्म डीग जिले के कैथवाड़ा गांव में एक मेवाती जोगी परिवार में हुआ था। उनके पिता बुद्ध सिंह जोगी, सारंगी वादन के उस्ताद थे। मेवाती जोगी रामायण, महाभारत, भगवान श्रीकृष्ण और अन्य हिंदू देवी-देवताओं की पौराणिक कथाओं को अपनी विशिष्ट शैली में गाकर प्रस्तुत करते हैं। अपनी कला के लिए गफरूद्दीन को वर्ष 2016 में भाजपा सरकार के कार्यकाल में राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इसके बाद वर्ष 2024 में उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार भी प्रदान किया गया।
भपंग के अलावा वे अलगोजा, चिकारा और जोगी सारंगी सहित करीब 12 पारंपरिक लोक वाद्य यंत्रों में निपुण हैं. वे इंग्लैंड की महारानी के समक्ष भी अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके हैं। पद्मश्री से पहले उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है.
कौन हैं तगा राम भील और उनका योगदान
वहीं जैसलमेर के रहने वाले तगा राम भील को भी लोक कला के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया जा रहा है। उन्हें अलगोजा के साथ-साथ मटका और बांसुरी बजाने में भी निपुणता हासिल है. वे बचपन में पिता का अलगोजा बजाया करते थे और महज 10 साल की उम्र में उन्होंने इसमें महारत हासिल कर ली. उन्हें आदिवासी लोक संगीत परंपरा का सशक्त प्रतिनिधि माना जाता है।
तगा राम भील ने फ्रांस, अमेरिका, जापान, रूस सहित कई यूरोपीय देशों में प्रस्तुतियों और कार्यशालाओं के माध्यम से राजस्थान की आदिवासी लोक कला को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया है. सीमित संसाधनों और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपनी निरंतर साधना से लोक संगीत को नई पहचान दिलाई है।
स्वामी ब्रह्मदेव महाराज कौन हैं ?
स्वामी ब्रह्मदेव महाराज एक समाजसेवी हैं.वो श्रीगंगानगर स्थित श्री जगदंबा अंधविद्यालय के संस्थापक हैं। उन्होंने 13 दिसंबर 1980 को इस संस्थान की स्थापना की थी। यहां नेत्रहीन बच्चों को निःशुल्क शिक्षा दी जाती है, साथ ही उनके लिए आवासीय हॉस्टल की सुविधा भी उपलब्ध है। इसके अलावा संस्थान के अंतर्गत मूक-बधिर बच्चों के लिए भी एक विद्यालय संचालित किया जा रहा है. स्वामी ब्रह्मदेव महाराज द्वारा स्थापित श्री जगदंबा धर्मार्थ नेत्र चिकित्सालय के माध्यम से पिछले 25 वर्षों से नि:शुल्क नेत्र जांच शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें जरूरतमंदों को इलाज की सुविधा प्रदान की जाती है.




