कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीति को लेकर बड़ा संकेत दिया है। पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह मुख्यमंत्री पद के लिए किसी चेहरे की घोषणा किए बिना ही चुनाव मैदान में उतरेगी। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और उनके विकास एजेंडे को ही मुख्य आधार बनाकर जनता के बीच जाएगी।
भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि भाजपा के लिए किसी एक व्यक्ति का चेहरा उतना महत्वपूर्ण नहीं है, जितना कि जनता का भरोसा जीतना और मौजूदा सरकार के खिलाफ मजबूत विकल्प पेश करना। उनका कहना है कि चुनाव के बाद पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व और संसदीय बोर्ड परिस्थितियों को देखते हुए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला करेगा।
उन्होंने इस चुनाव को तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की नीतियों के खिलाफ सीधी लड़ाई बताया। भाजपा का आरोप है कि राज्य में तुष्टीकरण की राजनीति के कारण प्रशासनिक व्यवस्था कमजोर हुई है। पार्टी का दावा है कि यदि वह सत्ता में आती है तो सबसे पहले कानून-व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा और चुनाव के बाद होने वाली हिंसा पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
घुसपैठ का मुद्दा भी भाजपा के एजेंडे में प्रमुख स्थान रखता है। भट्टाचार्य ने कहा कि पार्टी अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान कर उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत हिरासत में लेने और देश से बाहर करने की नीति अपनाएगी। इसके अलावा राज्य में निवेश बढ़ाने और रोजगार के अवसर पैदा करने पर भी जोर दिया जाएगा।
राजनीतिक रूप से देखा जाए तो भाजपा की यह रणनीति चुनाव को मोदी बनाम ममता की सीधी टक्कर में बदलने की कोशिश है। पार्टी मानती है कि नरेंद्र मोदी का नेतृत्व और उनकी छवि पूरे देश में भरोसे का प्रतीक है, जिसका लाभ बंगाल में भी मिलेगा। भाजपा इस बार स्पष्ट बहुमत हासिल करेगी, हालांकि उन्होंने सीटों के आंकड़ों को लेकर कोई विशेष दावा नहीं किया। कुल मिलाकर, भाजपा बिना CM चेहरे के लेकिन बड़े राष्ट्रीय मुद्दों और नेतृत्व के सहारे बंगाल की सत्ता तक पहुंचने की तैयारी में है।



