किल्लत की ‘खबर’ गलत तो ड्रम में पेट्रोल-डीजल की ‘जमाखोरी’ सही कैसे

    परेशानी तो कुछ समय की हो सकती है पर बेवजह की नासमझी जिंदगी भर के लिए बड़ी मुसीबत ना बने, इसके लिए सबको अपनी-अपनी जिम्मेदारी निभाने की जरूरत है। वो सरकार हो या आम आदमी। यह भी सही है कि पेट्रोल-डीजल महंगा होने या खत्म होने की आशंका से भंडारण किया जा रहा है तो यह तो सोचिए की इसकी कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

    0
    18

    सरकार ने बता दिया कि घबराने की बात नहीं है, देश में अभी 60 दिन का ईंधन बचा हुआ है। गैस की किल्लत की ‘अफवाह’ न फैलाएं वरना सरकार कार्रवाई करने को बाध्य होगी। मतलब साफ है कि ईरान के इजरायल-अमेरिका से चल रहे युद्ध से परेशान न हों, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा-राज्यसभा में कह ही चुके हैं कि संकट के इस दौर में कोरोना काल की तरह हम सबको मिलकर लड़ना है। नायरा एनर्जी ने पेट्रोल- डीजल के दाम बढ़ा दिए हैं। इन सबके बीच गैस सिलेंडर के बाद अब लोग पेट्रोल-डीजल का स्टॉक करने लगे हैं। कई वायरल वीडियो के जरिए ही यह सामने आया कि पेट्रोल-डीजल ड्रम में भरवाकर ले जाया जा रहा है। यह अव्यवस्था ही नहीं, बल्कि बड़े हादसे को निमंत्रण देना जैसा है। ये डर है या मुनाफाखोरी का खेल, समझ नहीं आ रहा। प्रदेश में कई जगह गोदामों और आवासीय इलाकों से बड़ी संख्या में घरेलू सिलेंडर बरामद हो रहे हैं। कई स्थानों पर व्यावसायिक उपयोग के लिए घरेलू गैस सिलेंडर पकड़े गए। इसी तरह जोधपुर समेत कई शहरों में भी ड्रमों में पेट्रोल-डीजल भरकर अवैध भंडारण का मामला पकड़ में आया है।

    अब खतरे को न डीजल-पेट्रोल ले जाने वाले भांप रहे हैं न ही पेट्रोल पंप वाले समझदारी दिखा रहे हैं। चलती बसों में आग की घटनाएं हो रही हैं तो घर में जमा गैस के सिलेंडर या पेट्रोल-डीजल के रिस्क को नजरअंदाज किया जा सकता है। पेट्रोल अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थ है। इसे सामान्य प्लास्टिक ड्रम या खुले कंटेनरों में रखना बेहद खतरनाक है। गर्मी, घर्षण या मामूली चिंगारी भी विस्फोट का कारण बन सकती है। घरों या घनी आबादी वाले इलाकों में ऐसा भंडारण खतरनाक है जो जान-माल के लिए घातक है। डीजल को अपेक्षाकृत कम ज्वलनशील माना जाता है, लेकिन बड़ी मात्रा में इसका भंडारण भी सुरक्षित नहीं है। रिसाव, आग या गलत तरीके से संग्रहण से नुकसान की आशंका बनी रहती है। इसके अलावा, घरों में ईंधन जमा करना कानूनी रूप से भी सवालों के घेरे में आता है। यही हाल गैस सिलेंडरों का है, लोग ब्लैक में खरीद कर जमा कर रहे हैं। उन्हें लगता है कि स्थिति बिगड़ने वाली है, उत्तरप्रदेश में एक नेता के यहां से 40 सिलेंडर बरामद किए गए।गैस सिलेंडरों की जमाखोरी पकड़ी गई, ड्रमों में पेट्रोल-डीजल ले जाते लोग दिखे, कालाबाजारी के मामले सामने आए, इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर हम यह खतरा मोल क्यों ले रहे हैं?

    इससे यह भी साफ होता है कि सरकार पर भरोसा घट रहा है, लोग कोरोना काल में भुगती परेशानियों के चलते ऐसा कर रहे हैं। कोरोना काल में लगे लॉक डाउन को भला कौन भूल पाएगा जब सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर लोग अपने घर पहुंचे थे। उस समय भी गैस के साथ पेट्रोल-डीजल की नहीं तो अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति करना मुसीबत बन गया था। युद्ध कब तक चलेगा, यह तो पता नहीं पर घर-गोदाम में गैस या फिर पेट्रोल-डीजल का स्टॉक करना बड़ा खतरा है। यह भी सोचने की जरूरत है कि क्या थोड़ी असुविधा से बचने के लिए हम बड़े हादसे का जोखिम उठाना चाहते हैं? घर में रखा अतिरिक्त पेट्रोल-डीजल या गैस सिलेंडर किसी भी समय दुर्घटना का कारण बन सकता है। ऐसी घटनाओं में नुकसान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि बहुतों को भुगतना पड़ता है। कहीं सिलेंडर मिल नहीं रहे तो कहीं ब्लैक किए जा रहे हैं। पेट्रोल पंप से आखिर डीजल-पेट्रोल क्यों ड्रमों में दिया जा रहा है। लोगों को भी सावधान रहना होगा। हम हादसों को क्यों आमंत्रित कर रहे हैं, परेशानी तो कुछ समय की हो सकती है पर बेवजह की नासमझी जिंदगी भर के लिए बड़ी मुसीबत ना बने, इसके लिए सबको अपनी-अपनी जिम्मेदारी निभाने की जरूरत है। वो सरकार हो या आम आदमी। यह भी सही है कि पेट्रोल-डीजल महंगा होने या खत्म होने की आशंका से भंडारण किया जा रहा है तो यह तो सोचिए की इसकी कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है। न अफवाह उड़े न कालाबाजारी या फिर भंडारण हो, इस पर ध्यान देने की जरूरत है।