जब तक सरकारी सिस्टम रहेगा वीक, पेपर होते रहेंगे लीक

    Rajasthan SI Exam 2021: पेपर लीक सिर्फ परीक्षा की गड़बड़ी नहीं, यह युवाओं के सपनों की चोरी है। जब तक सरकार ठोस और कठोर निर्णय नहीं लेगी, तब तक यह सिलसिला चलता रहेगा। दोषियों को सजा मिले और ईमानदार युवाओं के साथ नाइंसाफी न हो, इसके लिए तो सरकार को कुछ सोचना चाहिए।

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    Rajasthan SI Exam 2021

    Rajasthan SI Exam 2021: एसआई भर्ती 2021 रद्द कर दी गई। हाईकोर्ट की खण्डपीठ ने बड़े पैमाने पर पेपर लीक और धांधली पर मुहर लगाते हुए यह फैसला सुनाया। साथ ही करीब सवा दो लाख अभ्यर्थियों को आयु सीमा में छूट भी मिलेगी। सरकार ने कोर्ट में भर्ती रद्द करने को गलत बताने की दलील दी थी। परीक्षा से पहले RPSC के सदस्यों ने पेपर लीक कर दिया। इस लंबी धांधली में बड़े-बड़े जिम्मेदार शामिल हुए। किसी ने अपने बेटे-बेटी तो किसी ने अपने बहू-दामाद को एसआई बनाने की जोड़-तोड़ की। मामला खुला तो बहुतों के सपने टूट गए। ख्वाहिशें उनकी भी खत्म हुई जिन्होंने मेहनत से पर्चा पास किया और अब फिर उन्हें दोबारा परीक्षा देनी होगी। पिछले कुछ सालों से परीक्षा कराना ही सरकार और सिस्टम के लिए कड़ी चुनौती बन गया। मजे की बात यह कि कई भर्ती परीक्षा में राजस्थान ही नहीं पूरे देश में इसी तरह का गड़बड़झाला सामने आया। रीट भर्ती हो या कांस्टेबल, लाइब्रेरियन, जेईएन सिविल समेत अनेक भर्ती पेपर लीक-वायरल के चलते परीक्षा रद्द की गई। अनगिनत गिरफ्तार हुए तो वे धीरे-धीरे जमानत पर बाहर आ गए। कुछ के कोचिंग सेंटर पर बुलडोजर चला कर सरकार धन्य हो गई। मानों जो कुछ भी गलत हुआ उसकी सजा पूरी कर दी गई।

    लाखों अभ्यर्थियों की उम्मीदों पर पानी फिर गया पर सरकार-सिस्टम ने कभी अपनी गलती नहीं मानी। सरकार का हिस्सा रहे कई जिम्मेदार खुद को बचाते दिखे तो बहुतों को सरकार ने संरक्षण दिया। राजस्थान में सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के लिए भर्ती परीक्षाएं उम्मीद का रास्ता होती हैं, लेकिन बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक और धांधलियों ने इस भरोसे को बुरी तरह झकझोर दिया है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि अदालतों को हस्तक्षेप कर परीक्षाएं रद्द करनी पड़ रही हैं। 2021 की सब-इंस्पेक्टर भर्ती इसका सबसे बड़ा उदाहरण बन गई। हाल ही में उच्च न्यायालय ने 2021 की एसआई भर्ती प्रक्रिया को बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों और पेपर लीक के कारण रद्द कर दिया, यह बताते हुए कि पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर ही प्रश्नचिह्न लग गया था। अदालत ने यहां तक टिप्पणी की कि भर्ती प्रक्रिया में इतनी व्यापक अनियमितताएं थीं कि ईमानदार और फर्जी उम्मीदवारों में अंतर करना संभव नहीं रहा। फैसले में राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) के चेयरपर्सन सहित छह सदस्यों को जिम्मेदार ठहराए जाने की बात भी सामने आई। इस मामले में 122 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हुई।

    बार-बार पेपर लीक होना बताता है कि समस्या व्यक्तियों की नहीं, व्यवस्था की है। इसी तरह पेपर लीक के बाद सरकार ने रीट-2021 की लेवल-2 परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने का निर्णय लिया था। हर पेपर लीक के बाद बयान आए, सख्त कार्रवाई का दावा भी किया गया, लेकिन सिस्टम में ठोस बदलाव नहीं किए। भर्ती परीक्षाएं कराने वाली एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठे, फिर भी जवाबदेही तय नहीं हो सकी। बड़ी समस्या है अंदरूनी मिलीभगत। कई मामलों में आयोग से जुड़े लोगों तक की भूमिका सामने आई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि सुरक्षा व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित रही। राजस्थान लोक सेवा आयोग और अन्य भर्ती एजेंसियों पर निगरानी मजबूत नहीं की गई। तकनीकी सुधारों का आधा-अधूरा क्रियान्वयन भी इसकी बड़ी वजह है। डिजिटल सुरक्षा, एन्क्रिप्टेड पेपर, एक दिन में परीक्षा – ये सब सुझाव वर्षों से दिए जा रहे हैं, लेकिन जमीन पर लागू नहीं हुए। लाखों अभ्यर्थी बार-बार परीक्षा दें और फिर भी उनका भविष्य अनिश्चित रहे तो यह सिर्फ प्रशासनिक विफलता नहीं, सामाजिक अन्याय है। पेपर लीक सिर्फ परीक्षा की गड़बड़ी नहीं, यह युवाओं के सपनों की चोरी है। जब तक सरकार ठोस और कठोर निर्णय नहीं लेगी, तब तक यह सिलसिला चलता रहेगा। दोषियों को सजा मिले और ईमानदार युवाओं के साथ नाइंसाफी न हो, इसके लिए तो सरकार को कुछ सोचना चाहिए। इन भर्ती परीक्षाओं को रद्द कराने वाले दोषी लोगों को सजा कब मिलेगी। जनता के करोड़ों-अरबों रुपए बर्बाद हो गए, सपने टूटे फिर भी उनका कुछ नहीं बिगड़ा जो इसके लिए जवाबदेह थे। ऐसे में सरकार पर भरोसा कैसे हो।