वॉशिंगटन। नासा का ऐतिहासिक आर्टेमिस-II मिशन सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। इस मिशन के चारों अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर लौट आए। उनका अंतरिक्ष यान ‘ओरायन’ प्रशांत महासागर में सैन डिएगो तट के पास रात 8:07 बजे (ईटी) सफलतापूर्वक स्प्लैशडाउन हुआ। इस उपलब्धि के साथ ही मानव अंतरिक्ष उड़ान के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है, क्योंकि करीब 50 वर्षों के बाद पहली बार इंसानों ने चंद्रमा की दिशा में इतनी लंबी यात्रा की।
स्प्लैशडाउन के तुरंत बाद नासा की रिकवरी टीम सक्रिय हो गई। अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित रूप से कैप्सूल से बाहर निकाला गया और हेलीकॉप्टर के माध्यम से अमेरिकी नौसेना के एक जहाज तक पहुंचाया गया। अधिकारियों के अनुसार, सभी अंतरिक्ष यात्री स्वस्थ हैं और मिशन की सफलता को लेकर बेहद उत्साहित नजर आए।
इस मिशन का सबसे जोखिम भरा चरण पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश, यानी ‘री-एंट्री’ था। ओरायन कैप्सूल को इस दौरान अत्यधिक तापमान और घर्षण का सामना करना पड़ा। विशेष चिंता का विषय यह था कि इस यान के हीट शील्ड में पहले से कुछ डिजाइन संबंधी खामियों की जानकारी थी। यह हीट शील्ड अंतरिक्ष यात्रियों को हजारों डिग्री तापमान से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हालांकि, सभी आशंकाओं को पीछे छोड़ते हुए यह प्रणाली सफल रही और अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित बाहर निकले।

10 दिनों तक चले इस मिशन ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां दर्ज कीं। आर्टेमिस-II के अंतरिक्ष यात्री 50 वर्षों में चंद्रमा की दिशा में जाने वाले पहले इंसान बने। इसके साथ ही उन्होंने पृथ्वी से अब तक की सबसे अधिक दूरी तय करने का नया रिकॉर्ड भी बनाया। यह मिशन नासा के शक्तिशाली स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट और ओरायन अंतरिक्ष यान के साथ पहली मानव उड़ान भी था।
नासा के अनुसार, आर्टेमिस-II मिशन भविष्य के आर्टेमिस कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य आने वाले वर्षों में मानव को चंद्रमा पर फिर से उतारना और वहां दीर्घकालिक उपस्थिति स्थापित करना है। इस सफलता ने न केवल तकनीकी क्षमताओं को साबित किया है, बल्कि अंतरिक्ष अन्वेषण के नए युग की शुरुआत का संकेत भी दिया है।



