Salumber Child Deaths : सलूंबर। राजस्थान के नवनिर्मित जिले सलूंबर में मासूम बच्चों की रहस्यमयी मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सलूंबर विधायक थावरचंद डामोर ने इस संकट पर गहरी चिंता जताते हुए सीधे तौर पर स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और प्रशासनिक सुस्ती को कटघरे में खड़ा कर दिया है। विधायक डामोर ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जिले में विशेषज्ञों की विशेष टीम स्थाई रूप से तैनात करने की मांग की है, ताकि घाटा और झल्लारा जैसे आदिवासी अंचलों में रोज बुझ रहे घरों के चिरागों को बचाया जा सके।
8 दिन, 13 मौतें और गहराता सस्पेंस
सलूंबर के घाटा, झल्लारा और लसाड़िया गांवों में पिछले एक हफ्ते में करीब 13 बच्चों की जान जा चुकी है। मौत का यह आंकड़ा डराने वाला है क्योंकि इसमें बीमारी का पैटर्न बेहद अजीब है। बच्चों को शाम के समय हल्की उल्टी-दस्त की शिकायत होती है, फिर शरीर में अचानक अकड़न आती है और महज 24 से 48 घंटे के भीतर मासूम दम तोड़ देते हैं।
क्या है मौत की असली वजह?
स्वास्थ्य विभाग अब तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सका है। उदयपुर एमबी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आर.एल. सुमन के अनुसार, शुरुआती जांच में जापानी इंसेफेलाइटिस (Japanese Encephalitis) की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। अब स्वास्थ्य विभाग को पुणे स्थित नेशनल वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट (NIV) की रिपोर्ट का इंतजार है। विशेषज्ञों को संदेह है कि यह चांदीपुरा वायरस (CHPV) या सेरेब्रल मलेरिया का कोई घातक रूप हो सकता है।
सियासत भी हुई तेज
विधायक थावरचंद डामोर के तीखे तेवरों के बाद राज्य सरकार भी हरकत में आई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय रिपोर्ट मांगी है। वहीं, स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने दावा किया है कि 3,600 से ज्यादा टीमें घर-घर सर्वे कर रही हैं और अब तक 52 हजार से अधिक घरों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है।
जनजाति क्षेत्रों में बड़ी चुनौतियां
इस त्रासदी के बीच स्वास्थ्य विभाग को ग्रामीणों के विरोध का भी सामना करना पड़ रहा है। साक्षरता की कमी और अंधविश्वास के कारण कई ग्रामीण इसे ‘ऊपरी साया’ मानकर बच्चों का इलाज करवाने या सैंपल देने से कतरा रहे हैं। विधायक डामोर ने प्रशासन से अपील की है कि वे जागरूकता अभियान चलाएं ताकि समय रहते बच्चों को अस्पताल पहुंचाया जा सके।



