नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच केंद्र सरकार सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों को राहत देने के लिए 2.5 लाख करोड़ रुपये की ऋण गारंटी योजना लाने पर विचार कर रही है। इस योजना का उद्देश्य उन कारोबारों को सहारा देना है जो वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ती लागत के कारण वित्तीय दबाव में हैं।
प्रस्तावित योजना के तहत, अमेरिका-ईरान संघर्ष से प्रभावित उधारकर्ताओं द्वारा ऋण चुकाने में चूक होने पर बैंकों को 100 करोड़ रुपये तक के कर्ज पर लगभग 90 प्रतिशत तक की सरकारी गारंटी दी जाएगी। यह गारंटी नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी के माध्यम से प्रदान की जाएगी। योजना के लिए सरकार को लगभग 17,000 से 18,000 करोड़ रुपये का प्रावधान करना पड़ सकता है।
यह पहले कोविड-19 महामारी के दौरान लागू आपात ऋण गारंटी योजना की तर्ज पर तैयार की जा रही है, जिसने उस समय एमएसएमई और अन्य व्यवसायों को वित्तीय राहत देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उस योजना के तहत बिना अतिरिक्त मूल्यांकन के ऋण उपलब्ध कराया गया था और ब्याज दरों पर सीमा भी तय की गई थी। सरकार ने हाल के दिनों में आम उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए भी कदम उठाए हैं।
26 मार्च को पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई, ताकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर कम किया जा सके।उल्लेखनीय है कि अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर सैन्य कार्रवाई और उसके बाद की जवाबी कार्रवाई से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में करीब 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। भारत, जो कच्चे तेल, उर्वरक और प्राकृतिक गैस का बड़ा आयातक है, इस स्थिति से सीधे प्रभावित हो रहा है।



