Wednesday, February 25, 2026
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Delhi High Court verdict : दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा- सिर्फ संबंध टूटना आत्महत्या के लिए उकसाने का पर्याप्त आधार नहीं माना जा सकता

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि केवल प्रेम संबंध टूटना आत्महत्या के लिए उकसाने का पर्याप्त आधार नहीं माना जा सकता। अदालत ने पूर्व प्रेमिका की आत्महत्या मामले में आरोपी को जमानत देते हुए कहा कि उकसावा ऐसा होना चाहिए जिससे पीड़ित के पास कोई विकल्प न बचे। कोर्ट ने माना कि यह रिश्ता टूटने का मामला प्रतीत होता है, जिसकी सच्चाई ट्रायल के दौरान ही तय होगी।

Delhi High Court verdict : नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने कहा है कि महज संबंध टूटने को आत्महत्या के लिए उकसाने का पर्याप्त आधार नहीं माना जा सकता। न्यायमूर्ति मनोज जैन ने एक व्यक्ति की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। उस पर अपनी पूर्व प्रेमिका को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है। आरोपी की शादी दूसरी महिला से होने पर व्यक्ति की पूर्व प्रेमिका ने फंदे से लटक कर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। आरोपी को जमानत देते हुए अदालत ने कहा कि उकसावा इस तरह का होना चाहिए कि पीड़ित के पास आत्महत्या करने के सिवा कोई और विकल्प न बचे।

रिश्ता टूटना उकसावे का पर्याप्त आधार नहीं: अदालत

अदालत ने कहा कि केवल मुकदमे की सुनवाई से ही यह तय हो सकेगा कि ‘‘यह कठोर कदम’’ उकसावे के कारण उठाया गया था या फिर अति संवेदनशील युवती होने के कारण। वर्तमान मामले में, अदालत ने गौर किया कि मृत्यु पूर्व कोई बयान नहीं दिया गया था और दोनों पक्ष लगभग आठ वर्षों से रिश्ते में थे, जिस दौरान महिला (मृतका) की ओर से कोई शिकायत नहीं की गई थी। अदालत ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत बंद होने की तिथि और आत्महत्या की तारीख के बीच लंबा अंतराल है। अदालत ने 24 फरवरी को पारित आदेश में कहा, ‘‘स्पष्ट रूप से यह रिश्ता टूटने का मामला प्रतीत होता है और संभवतः महिला को जब पता चला कि याचिकाकर्ता ने किसी और से शादी कर ली है, तो उसने आत्महत्या करने का विकल्प चुना।’’

अदालत के आदेश में कहा गया है, ‘‘हालांकि आजकल रिश्ते टूटना और दिल टूटना आम बात हो गई है, लेकिन केवल संबंध टूटना ही अपने आप में उकसाने का मामला नहीं माना जा सकता, ताकि इसे भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाने) के तहत अपराध माना जा सके।’’ मृतका के पिता के अनुसार, उनकी बेटी को आरोपी ने बहलाया-फुसलाया था और शादी के लिए उस पर अपना धर्म बदलने का दबाव डाला था। इसी दबाव के कारण उनकी बेटी ने अक्टूबर 2025 में दुपट्टे से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। आरोपी को नवंबर 2025 में गिरफ्तार किया गया था।

अदालत ने कहा कि महिला के दोस्तों के अनुसार, वह परेशान थी और कहा कि धर्म परिवर्तन के लिए उस पर कभी दबाव नहीं बनाया गया था। अदालत ने कहा कि आरोपी ने फरवरी 2025 से उससे बात करना बंद कर दिया था। आदेश के अनुसार, व्यक्ति को 25,000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही रकम की जमानत राशि पर जमानत पर रिहा कर दिया गया। आरोपी ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच लगभग आठ वर्षों से मधुर संबंध थे लेकिन महिला के माता-पिता इस रिश्ते के खिलाफ थे क्योंकि वे अलग-अलग धर्मों से ताल्लुक रखते थे। व्यक्ति ने आरोप लगाया कि महिला के माता-पिता ने ही उसे संबंध तोड़ने के लिए मजबूर किया था।

Mukesh Kumar
Mukesh Kumarhttps://jagoindiajago.news/
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