Thursday, March 12, 2026
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LPG Gas Crisis: गैस की किल्लत नहीं होती तो जनता को नहीं सहनी पड़ती जिल्लत

LPG Gas Crisis: ईरान के अमेरिका-इजरायल के साथ चल रहे युद्ध का असर अब अपने देश में भी दिखने लगा है। युद्ध शुरू हुए अभी 15 दिन भी नहीं बीते कि देश की जनता रसोई गैस सिलेंडर के लिए मारे-मारे घूमने लगी है। किसी आशंका के चलते गैस सिलेंडर जमा कराने की होड़ कहें या जरूरत, बेबसी हर गली-मोहल्लों में दिखने लगी है। कमर्शियल सिलेंडरों पर लगी रोक ने शादी-विवाह तक की खुशियां फीकी कर दी है।

प्रतीक चौवे, संपादक

ईरान के अमेरिका-इजरायल के साथ चल रहे युद्ध का असर अब अपने देश में भी दिखने लगा है। युद्ध शुरू हुए अभी 15 दिन भी नहीं बीते कि देश की जनता रसोई गैस सिलेंडर के लिए मारे-मारे घूमने लगी है। किसी आशंका के चलते गैस सिलेंडर जमा कराने की होड़ कहें या जरूरत, बेबसी हर गली-मोहल्लों में दिखने लगी है। कमर्शियल सिलेंडरों पर लगी रोक ने शादी-विवाह तक की खुशियां फीकी कर दी है। घर ही नहीं रेस्टोरेंट-होटल तक गैस की किल्लत नजर आ रही है। केन्द्र सरकार से लेकर राज्य सरकार ही नहीं संबंधित विभाग तक कह रहे हैं कि जनता को परेशान होने की जरूरत नहीं है, किसी भी अफवाह से बचा जाए। दूसरी ओर हालत यह है कि सिलेंडर तक बुक नहीं हो रहे, गैस एजेंसी तक पहुंचने वाले उपभोक्ताओं को जबरन की मुसीबतें झेलनी पड़ रही है। चंद दिनों के युद्ध के बाद का यह हाल बताने लगा है कि इसके असर का भारत में घर-घर दिखने लगा है। अंतरराष्ट्रीय तनाव और युद्ध का असर केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका सीधा प्रभाव आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ता है। हाल के वैश्विक हालात और युद्ध जैसी परिस्थितियों के बाद देश के कई हिस्सों में रसोई गैस की किल्लत और कालाबाजारी से दिखने लगा है। गैस सिलेंडर की उपलब्धता कम होने और मांग बढ़ने के कारण आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

दरअसल, जब भी दुनिया में किसी बड़े क्षेत्र में युद्ध या तनाव की स्थिति बनती है, तो ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति पर असर पड़ता है। ऐसे में जब ईरान जैसा देश युद्ध की चपेट में हो तो तेल-गैस पर असर पड़ना तो स्वाभाविक है। भारत में रसोई गैस सिलेंडर की कीमत हाल ही में बढ़ाई गई है। सरकार ने एस्मा तक लागू कर दिया फिर भी हालात बेकाबू हैं। कई जगह हालात ऐसे हैं कि उपभोक्ताओं की गैस बुकिंग तक नहीं हो पा रही। फोन, ऐप या एजेंसी-हर जगह लोगों को निराशा ही हाथ लग रही है। ऐसे में रसोई चलाना तक मुश्किल हो गया है और आमजन की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। दरअसल, गैस की मांग और आपूर्ति के बीच बढ़ते अंतर ने व्यवस्था को कमजोर कर दिया है। एस्मा लागू हो गया, जिला प्रशासन नंबर जारी कर कह रहा है कि सिलेंडर की मुश्किल हो तो तुरंत कॉल करें। सरकार कह रही है कि न किल्लत न काला बाजारी, ऐसे में दिनभर देश के कोने-कोने में सिलेंडर के लिए लगी कतारें, आखिर क्या बताना चाहती हैं।

उपभोक्ताओं को तय कीमत पर सिलेंडर नहीं मिल रहा, जबकि कुछ जगह अतिरिक्त पैसे देकर गैस मिलने की शिकायतें सुनाई दे रही हैं। सिलेंडरों की काला बाजारी होने लगी है, बावजूद इसके मंत्री ही नहीं मुख्य सचिव-कलेक्टर तक कह रहे हैं कि कहीं कोई दिक्कत नहीं है। परेशानी नहीं है तो फिर उपभोक्ताओं के लिए बुकिंग की अवधि तय क्यों की गई। एक तरफ केन्द्र सरकार के आला अधिकारी कह रहे हैं कि 25 फीसदी गैस उत्पादन बढ़ गया तो फिर ऐसी किल्लत क्यों? जरूरत इस बात की है कि गैस कंपनियां और प्रशासन मिलकर वितरण प्रणाली को पारदर्शी और प्रभावी बनाएं। जिन क्षेत्रों में बुकिंग बंद है या सिलेंडर की कमी है, वहां तुरंत अतिरिक्त आपूर्ति भेजी जाए। साथ ही एजेंसियों की निगरानी बढ़ाकर कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई की जाए। आखिरकार रसोई गैस कोई विलासिता की वस्तु नहीं, बल्कि आम आदमी की बुनियादी जरूरत है। यदि समय पर गैस न मिले तो सबसे ज्यादा असर आम परिवारों पर पड़ता है। ऐसे में सरकार और प्रशासन को तुरंत कदम उठाकर व्यवस्था दुरुस्त करनी चाहिए, ताकि उपभोक्ताओं को राहत मिल सके और रसोई की आग बुझने न पाए। सरकार को चाहिए कि वो जो वादे-दावे कर रही है। सिलेंडर की आवश्यकता को समझा जा सकता है। आम जन की सबसे महत्ती आवश्यकता पर ध्यान देने की आवश्यकता है। सरकार को दावों की हकीकत से भी वास्ता रखना होगा। सरकार बार-बार कह रही है कि सबकुछ ठीक है, फिर जनता की परेशानी-बेचैनी की वजह भी तो जाने।

Prateek Chauvey
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माननीय प्रतीक चौबे जी(Prateek Chauvey ) द्वारा प्रस्तुत यह मंच जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और प्रेरणा भरने का प्रयास है। यहाँ दी गई जानकारी आपकी व्यक्तिगत और व्यावसायिक यात्रा में सहायक होगी, आपको नई सोच के साथ बदलाव और सफलता की ऊँचाइयों तक पहुँचने के लिए प्रेरित करेगी।
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