Land for Job Scam Case: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख एवं पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, उनके परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों के खिलाफ कथित जमीन के बदले नौकरी घोटाला मामले में आरोप तय कर दिए हैं.अदालत ने रेलवे अधिकारियों समेत 52 लोगों को बरी कर दिया है.
Land for Job case | Rouse Avenue court framed charges against Lalu Prasad Yadav, Rabri Devi, Misa Bharti, Tejaswi Yadav, Tej Pratap Yadav, Hema Yadav https://t.co/9NgoMYx573
— ANI (@ANI) January 9, 2026
‘रेल मंत्रालय को अपनी निजी जागीर के रूप में इस्तेमाल किया’
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा कि यादव ने रेल मंत्रालय को अपनी निजी जागीर के रूप में इस्तेमाल किया ताकि वह एक आपराधिक गतिविधि को अंजाम दे सकें, जिसमें सरकारी नौकरी को सौदेबाजी के हथियार के रूप में इस्तेमाल करके यादव परिवार ने रेलवे अधिकारियों और अपने करीबी सहयोगियों की मिलीभगत से जमीन हासिल की. अदालत ने इस मामले में 41 लोगों के खिलाफ आरोप तय किये हैं.
औपचारिक रूप से 23 जनवरी को आरोप होंगे तय
इससे पहले, CBI ने मामले में आरोपी व्यक्तियों की स्थिति के बारे में एक सत्यापन रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें कहा गया था कि उसके आरोप-पत्र में नामजद 103 आरोपियों में से 5 की मौत हो गई है. अदालत ने मामले में औपचारिक रूप से आरोप तय करने के लिए 23 जनवरी की तारीख तय की है.
#WATCH | Delhi | Land for job case | Advocate Azaz Ahmed," The CBI court has framed charges against Lalu Prasad Yadav, Misa Bharti, Tejashwi Yadav, Tej Pratap Yadav and Hema Yadav under sections 420, 120B and 13 IPC…Formal charges will be framed on January 29." https://t.co/OKFN0LpHXg pic.twitter.com/PDynHnfRev
— ANI (@ANI) January 9, 2026
क्या है पूरा मामला ?
जांच एजेंसी ने कथित घोटाले के सिलसिले में लालू यादव, उनकी पत्नी एवं बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके बेटे तेजस्वी यादव और अन्य के खिलाफ आरोप-पत्र दायर किया था. आरोप है कि मध्यप्रदेश के जबलपुर में स्थित भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य जोन में ग्रुप-D श्रेणी में भर्तियां लालू यादव के रेल मंत्री रहते 2004 से 2009 के बीच की गईं. इसके बदले में भर्ती होने वाले लोगों ने राजद प्रमुख के परिवार के सदस्यों या सहयोगियों के नाम पर जमीन के टुकड़े तोहफ़े में दिए या हस्तांतरित किए.
नियुक्तियों में नियमों के उल्लंघन का भी दावा
सीबीआई ने यह भी दावा किया कि ये नियुक्तियां नियमों का उल्लंघन करके की गईं और इन लेन-देन में बेनामी संपत्तियां शामिल थीं, जो आपराधिक कदाचार और साजिश के समकक्ष है. आरोपियों ने आरोपों से इनकार किया और दावा किया है कि यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है.
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