Wednesday, July 15, 2026
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कुडनकुलम न्यूक्लियर प्लांट पर बड़ा साइबर अटैक! हैकर्स ने संवेदनशील दस्तावेज डार्क वेब पर सार्वजनिक करने का किया दावा

Kudankulam Nuclear Plant Data Breach: तमिलनाडु के कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र से जुड़े हजारों दस्तावेज लीक होने का दावा 'वर्ल्ड लीक्स' हैकर समूह ने किया है। रिपोर्ट के अनुसार, मई 2026 में योट्टा के सर्वर पर साइबर हमला हुआ था। रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने सर्वर हैक होने की पुष्टि की है, जबकि NPCIL, CERT-In और कंपनी संयुक्त जांच कर रहे हैं।

Kudankulam Nuclear Plant Data Breach: भारत के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में शामिल तमिलनाडु स्थित कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट से जुड़े हजारों दस्तावेज लीक हो गए हैं. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ‘वर्ल्ड लीक्स’ नामक हैकर समूह ने प्लांट से जुड़े संवेदनशील दस्तावेज डार्क वेब पर सार्वजनिक करने का दावा किया है. लीक दस्तावेजों में पावर प्लांट के कुछ हिस्सों के ब्लूप्रिंट, सप्लायरों की सूची, कंट्रोल रूम से जुड़े रिकॉर्ड, निरीक्षण रिपोर्ट और अन्य तकनीकी दस्तावेज शामिल हैं.

मई में सर्वर हैक, जून में लीक का दावा

रिपोर्ट के अनुसार, यह साइबर घटना मई 2026 में हुई थी, जबकि जून के अंत में हैकर समूह ने डेटा चोरी और दस्तावेज सार्वजनिक करने का दावा किया. इस पूरे मामले की जानकारी अब सामने आई है.

रिलायंस ने सर्वर हैक होने की पुष्टि की

कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट की यूनिट-3 और यूनिट-4 परियोजना पर कार्य कर रही रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने स्वीकार किया है कि उसके थर्ड-पार्टी डेटा सेंटर प्रदाता योट्टा का सर्वर साइबर हमले का शिकार हुआ था. कंपनी ने कहा है कि घटना की जानकारी संबंधित सरकारी एजेंसियों को दे दी गई है. हालांकि कंपनी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि कौन-कौन सा डेटा प्रभावित हुआ है.

जांच में जुटीं एजेंसियां

मामले की जांच न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL), रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) संयुक्त रूप से कर रहे हैं. फिलहाल यह जांच की जा रही है कि लीक किए गए दस्तावेज असली हैं या नहीं और यदि हैं, तो उनकी संवेदनशीलता कितनी है.

डेटा लीक कैसे हुआ?

रिपोर्ट के अनुसार-कुडनकुलम परियोजना से जुड़ा कुछ डेटा योट्टा के सर्वर पर संग्रहित था. 29 मई 2026 को योट्टा ने अपने सर्वर पर संदिग्ध गतिविधि का पता लगाया और साइबर हमले को रोकने का दावा किया. जून के अंत में रिलायंस को जानकारी मिली कि ‘वर्ल्ड लीक्स’ नामक हैकर समूह डेटा चोरी का दावा कर रहा है. डार्क वेब पर लगभग 8.58 लाख फाइलों में से करीब 19 हजार संवेदनशील दस्तावेज अपलोड करने का दावा किया गया.

कितना गंभीर है मामला?

परमाणु सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डार्क वेब पर मौजूद दस्तावेज वास्तविक हैं, तो इनके जरिए कोई भी हमलावर परमाणु संयंत्र की सप्लाई चेन, सपोर्ट सिस्टम और सुरक्षा व्यवस्था के बारे में अहम जानकारी हासिल कर सकता है. इससे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े जोखिम बढ़ सकते हैं. हालांकि अभी तक भारतीय एजेंसियों ने आधिकारिक रूप से यह पुष्टि नहीं की है कि लीक हुए सभी दस्तावेज वास्तविक हैं.

क्या होता है डार्क वेब?

डार्क वेब इंटरनेट का वह हिस्सा है, जिसे सामान्य वेब ब्राउजर के जरिए एक्सेस नहीं किया जा सकता. यहां पहुंचने के लिए विशेष ब्राउजर, जैसे टोर Browser, का उपयोग किया जाता है. साइबर अपराधी अक्सर चोरी किए गए डेटा को बेचने या सार्वजनिक करने के लिए इसी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं.

पहले भी हो चुका है साइबर हमला

गौरतलब है कि वर्ष 2019 में भी कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट के प्रशासनिक नेटवर्क पर साइबर हमला हुआ था. उस समय उत्तर कोरिया से जुड़े एक हैकर समूह के मैलवेयर की पुष्टि हुई थी. हालांकि NPCIL ने स्पष्ट किया था कि संयंत्र की परिचालन प्रणाली उस हमले से प्रभावित नहीं हुई थी.

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Premanshu Chaturvedi
Premanshu Chaturvedihttp://jagoindiajago.news
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