रिपोर्टर: मनीष कुमार शर्मा
जयपुर। नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क ने एक बार फिर देशभर में अपनी खास पहचान बनाई है। यह पहचान उत्तर भारत में वन्यजीवों के बड़े ब्रीडिंग सेंटर के तौर पर सामने आई है। यहां धुलंडी के दिन 3 मार्च को मादा हिप्पो(दरियाई घोड़ा) रानी ने एक बेबी हिप्पो को जन्म दिया है। जिसके बाद से ही वन्यजीव प्रेमियों में खुशी की लहर है।
दरअसल, जयपुर के Nahargarh Biological Park (एनबीपी) में विशेष डिजाइन किए गए एग्जॉटिक पार्क में मादा हिप्पो रानी ने तीसरी बार एक बेबी हिप्पो को जन्म दिया है। इसका वजन करीब 80 किलोग्राम बताया जा रहा है। एनबीपी के उपनिदेशक डॉ. अरविन्द माथुर ने बताया कि वर्ष 2019 में हिप्पो का एक जोड़ा राजा और रानी एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत नेशनल जूलोजाकिल पार्क नई दिल्ली से लाया गया था। दोनों की जोड़ी से 2020 में मादा हिप्पो राजकुमारी और वर्ष 2022 में नर हिप्पो राजकुमार का जन्म हुआ था। राजकुमारी ने 2025 में हिप्पो खुशी को जन्म दिया था। अब रानी के फिर से मां बनने के बाद यहां हिप्पो की संख्या 6 हो गई है। डीसीएफ विजयपाल सिंह ने बताया कि बेबी हिप्पो की 24 घंटे मॉनिटरिंग की जा रही है। मां के दूध के साथ-साथ विटामिन और मिनरल्स युक्त स्पेशल डाइट पर फोकस किया जा रहा है। गौरतलब है कि प्रदेश के दूसरे अन्य जैविक उद्यान में कहीं भी हिप्पो शावक या हिप्पो का जोड़ा नहीं है।
देश में सबसे ज्यादा यंग टाइगर्स हैं यहां
प्रदेश में पहली बार NBP में 27 अप्रैल 2025 को बाघिन रानी ने एक साथ 5 शावकों को जन्म दिया था। यह प्रजनन ऐतिहासिक उपलब्धि के तौर पर दर्ज हुआ। इन शावकों में 4 शावक गोल्डन व एक शावक सफेद रंग का है। इससे पहले बाघिन रानी ने 2024 में तीन शावकों को जन्म दिया था। इसमें एक की मौत हो गई थी और दो शावक भीम(सफेद) और स्कंधी अभी करीब डेढ़ साल के हो चुके हैं। इस तरह देखा जाए तो यहां सबसे ज्यादा यंग टाइगर्स रहते हैं। पार्क में अभी बाघों का कुनबा 12 है, जिनमें मादा रानी, स्कंधी, चमेली, भक्ति और नर भीम, शिवाजी व गुलाब शामिल हैं। लगभग 11 महीनों के पांच शावकों का अभी नामकरण नहीं हुआ है।

स्लॉथ बियर का 3 बार सफल प्रजनन
नाहरगढ़ में पिछले वर्षों में भालू (स्लॉथ बियर) का तीन बार सफल प्रजनन हुआ है। भालू के जोड़े में नर शंभु और मादा झुमरी हैं। इस जोड़े ने यहां 2020 में गणेश को जन्म दिया, जो अभी कोटा में है। इसके बाद 2022 में कार्तिक(अभी नागपुर में) व कावेरी का जन्म हुआ। वर्ष 2024 की बात करें तो इस जोड़े से गौरी और गोपाल का जन्म हुआ। इस तरह यहां स्लॉथ बियर की संख्या कुल 5 है।
27 प्रजाति के 260 से अधिक वन्यजीव
नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क वर्ष 2016 में दर्शकों के लिए खोला गया था। वन्यजीवों को प्राकृतिक आवास व संरक्षण देने की दिशा में यह पार्क पिछले 10 सालों में उत्तर भारत में प्रमुख ब्रीडिंग सेंटर के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। यहां 27 प्रजाति के 260 से अधिक वन्यजीव हैं और इनमें लेपर्ड को छोड़कर सभी के द्वारा प्रजनन किया गया है। लेपर्ड के प्रजनन पर केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की रोक है। उपनिदेशक डॉ. अरविंद माथुर के अनुसार नाहरगढ़ पार्क में शेर, टाइगर सहित कई प्रजातियों का सफल प्रजनन हो रहा है। इनमें बाघ, शेर, भालू, हिप्पो, जरख, भेड़िया, गीदड़, लोमड़ी, हाइना, जैकाल, घडियाल, चौसिंगा(संकटग्रस्त प्रजाति) और हिरण फैमली के साथ ही दूसरे वन्यजीव भी हैं। उन्होंने बताया कि एक्सचेंज कार्यक्रम ने पार्क को दुर्लभ वन्यजीवों का खजाना बना दिया है।
भेड़ियों के संरक्षण पर विशेष ध्यान, जीनपूल विविधता जरूरी
पार्क में भेड़ियों के संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए कंजर्वेशन व ब्रीडिंग सेंटर का निर्माण कार्य चल रहा है, जिसके जल्द ही पूरा होने की उम्मीद है। जीनपूल बढ़ाने को लेकर यहां पिछले साल ही मैसूर से भेड़िए का जोड़ा लाया गया है, ताकि उनमें ब्रीडिंग चेंज हो सके। विशेषज्ञों के अनुसार वन्यजीवों में जैनेटिक डायवर्सिटी भी बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि एक ही कुनबे के वन्यजीवों में बार-बार प्रजनन के चलते बीमारियों का खतरा बढ़ने की आशंका बनी रहती है।




