Monday, January 12, 2026
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ISRO अंतरिक्ष में फिर रचेगा इतिहास, PSLV-C62 की कल होगी लॉन्चिंग, जानें इसके फायदे

ISRO सोमवार को PSLV-C62 मिशन लॉन्च करेगा। इसके लिए 22.5 घंटे की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। इस साल के पहले मिशन में एक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह सहित 14 घरेलू और विदेशी सह-उपग्रहों को कक्षा में स्थापित किया जाएगा।

ISRO भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण वाहन (PSLV) रॉकेट C62 मिशन के लॉन्च के लिए रविवार को साढ़े बाईस घंटे की उल्टी गिनती शुरू की. इस साल के पहले मिशन के जरिये पृथ्वी अवलोकन उपग्रह के साथ-साथ 14 अन्य सह उपग्रहों को कक्षा में स्थापित किया जाएगा.

इसरो की वाणिज्यिक शाखा, न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) के लिए भेजे जा रहे इस मिशन में 14 घरेलू और विदेशी उपग्रहों को कक्ष में स्थापित किया जाएगा. इसरो ने बताया कि 260 टन के भार वाले PSLV-C62 रॉकेट का प्रक्षेपण सोमवार को सुबह 10.17 बजे के बजाय सुबह 10.18 बजे के लिए रीशेड्यूल किया गया है.

सबसे पहले पृथ्वी अवलोकन उपग्रह को करेगा स्थापित

इसरो के सूत्रों ने रविवार को कहा, उल्टी गिनती दोपहर 12.48 बजे शुरू हुई. कुल अवधि 22 घंटे 30 मिनट है. प्रक्षेपण कल सुबह 10.18 बजे होगा.’ पीएसएलवी-सी62/EOS-N1 मिशन सबसे पहले थाईलैंड और ब्रिटेन द्वारा निर्मित पृथ्वी अवलोकन उपग्रह को कक्षा में स्थापित करेगा, जिसके बाद प्रक्षेपण के लगभग 17 मिनट बाद 13 अन्य उपग्रहों को सूर्य-समकालिक कक्षा में स्थापित किया जाएगा.

इसके बाद, रॉकेट के चौथे चरण (PS4) के अलग होने और स्पेनिश स्टार्टअप से संबंधित लगभग 25 किलोग्राम वजनी केस्ट्रेल इनिशियल टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर (KID) कैप्सूल स्थापित होगा. ऐसा प्रक्षेपण के 2 घंटे से अधिक समय बाद होने की उम्मीद है.

रॉकेट के चौथे चरण को फिर से प्रणोदित करेंगे

इसरो के मुताबिक, वैज्ञानिक रॉकेट के चौथे चरण को फिर से प्रणोदित करेंगे, ताकि KID कैप्सूल को पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश करते हुए प्रदर्शित किया जा सके. PS4 चरण और KID कैप्सूल (जो अंतिम सह-उपग्रह होगा) दोनों पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश करेंगे और दक्षिण प्रशांत महासागर में उतरेंगे. भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने PSLV के जरिये अबतक 63 मिशन को पूरा किया है, जिनमें महत्वाकांक्षी चंद्रयान-1, मंगलयान और आदित्य-एल1 मिशन शामिल हैं.

इस लॉन्च का क्या है महत्व ?

इस रॉकेट के जरिए EOS-अन्वेषा सैटेलाइट को भेजा जा रहा है, जो समुद्री निगरानी का काम करेगा। इस बार PSLV भारत और विदेशों के कई छोटे सैटेलाइट भी अपने साथ ले जा रहा है, जिनमें AI, इंटरनेट से जुड़े और छात्रों द्वारा विकसित किए गए रिसर्च सैटेलाइट शामिल हैं.

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Premanshu Chaturvedi
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