Wednesday, March 4, 2026
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Iran Chief Justice Warning : ईरान के प्रधान न्यायाधीश ने अमेरिका-इजराइल हमलों का समर्थन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी

ईरान के प्रधान न्यायाधीश गुलाम-होसैन मोहसेनी-एजेई ने चेतावनी दी है कि जो भी व्यक्ति अमेरिका-इज़राइल हमलों के समर्थन में बोलेगा या कार्रवाई करेगा, उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि दुश्मन के साथ सहयोग करने वालों को भी दुश्मन माना जाएगा। ऐसे मामलों में मृत्युदंड तक की सजा संभव है, जिससे देश में और कड़े दमन की आशंका बढ़ गई है।

Iran Chief Justice Warning : दुबई। ईरान के प्रधान न्यायाधीश ने बुधवार को आगाह किया कि जो भी व्यक्ति अमेरिका-इज़राइल के हवाई हमलों के समर्थन में कुछ कहेगा या करेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ग़ुलाम हुसैन मोहसेनी एजई ने यह बात ईरान के सरकारी टेलीविजन को दिए एक साक्षात्कार के दौरान कही। उनकी टिप्पणी से यह आशंका जताई जा रही है कि हिरासत में लिये गए लोगों पर मृत्युदंड से जुड़े आरोप लगाए जा सकते हैं, क्योंकि दुश्मन के साथ सहयोग करने पर दोषी पाए जाने की स्थिति में फांसी की सजा हो सकती है।

एजई ने जनवरी में हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कहा, “जैसा कि हमने अशांति के दौरान कहा था, दंगों से जुड़े मामले हमारी प्राथमिकता हैं। अब हमने यह भी ऐलान किया है कि जो कोई भी किसी भी तरह से दुश्मन के साथ सहयोग करेगा, उसे भी दुश्मन माना जाएगा।” उन्होंने कहा, “जो लोग अमेरिका और जायोनी शासन के एजेंडे के अनुरूप कुछ भी कहेंगे या करेंगे, वे दुश्मन के पक्ष में हैं और उनके साथ क्रांतिकारी और इस्लामी सिद्धांतों के अनुसार निपटा जाएगा।”

ईरान से युद्ध छेड़ने के ट्रंप के फैसले को लेकर मतभेद

ईरान युद्ध को लेकर अमेरिका में राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। पश्चिम एशिया में तेजी से फैलते संघर्ष और इससे अमेरिका के निकलने की स्पष्ट रणनीति के अभाव के बीच अमेरिकी सीनेट बुधवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के खिलाफ युद्ध में उतरने के फैसले पर मतदान की ओर बढ़ रही है। यह मतदान न केवल कांग्रेस (अमेरिकी संसद) के लिए एक असाधारण राजनीतिक परीक्षा है, बल्कि उस युद्ध पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है जो अमेरिका को एक बार फिर लंबे और अनिश्चित टकराव की राह पर ले जाता दिख रहा है। ‘वार पावर्स रिज़ॉल्यूशन’ नामक यह विधेयक सांसदों को यह अवसर देता है कि वे भविष्य में किसी भी सैन्य हमले से पहले कांग्रेस से मंजूरी लेने को अनिवार्य करने की मांग कर सके। सीनेट में पेश प्रस्ताव और प्रतिनिधि सभा में इस सप्ताह मतदान के लिए आने वाला समान विधेयक—दोनों का रिपब्लिकन-नियंत्रित कांग्रेस में पारित होना बेहद कठिन माना जा रहा है। और यदि किसी तरह ये पारित भी हो जाएं, तो लगभग तय है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन्हें वीटो कर देंगे।

फिर भी यह मतदान सांसदों के लिए एक अहम और ऐतिहासिक क्षण माना जा रहा है। पांच दिन पहले शुरू हुए इस युद्ध पर उनका फैसला अमेरिकी सैनिकों समेत अनगिनत जिंदगियों का भविष्य और पूरे क्षेत्र की दिशा तय कर सकता है। राष्ट्रपति ट्रंप कांग्रेस की मंजूरी के बिना इस युद्ध में शामिल हुए हैं। मंगलवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में सीनेट में डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने तीखे शब्दों में कहा, ‘‘जिन युद्धों के स्पष्ट उद्देश्य नहीं होते, वे कभी छोटे नहीं रहते। वे लंबे खिंचते चले जाते हैं, ज्यादा खून-खराबे और आर्थिक क्षति वाले बनते हैं। यह कोई आवश्यक युद्ध नहीं है। इसमें हम खुद कूदे हैं।” हालात संभालने के दावों के बीच ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी इस सप्ताह लगातार ‘कैपिटल हिल’ (जहां अमेरिका के सरकारी विभागों के मुख्यालय हैं) पर सक्रिय रहे, ताकि सांसदों को भरोसा दिलाया जा सके कि स्थिति नियंत्रण में है। मंगलवार को कैपिटल में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा, “हम अमेरिकी सैनिकों को खतरे में नहीं डालने जा रहे हैं।” लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और संकेत देती है। सप्ताहांत में कुवैत में ड्रोन हमले में छह अमेरिकी सैनिक मारे गए, जबकि क्षेत्र में सैकड़ों अन्य लोगों की भी जान जा चुकी है।

Mukesh Kumar
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