Iran US Peace Talks: ईरान और अमेरिका के बीच होने वाली वार्ता पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. ईरान के पाकिस्तान में राजदूत रजा अमीरी ने इस्लामाबाद वार्ता से जुड़ा अपना ट्वीट अचानक हटा दिया, जिससे वार्ता को लेकर अनिश्चितता, सस्पेंस और बढ़ गया है. दरअसल रजा अमीरी ने सुबह ट्वीट कर दावा किया था कि इजराइल द्वारा कथित सीजफायर उल्लंघन के बावजूद ईरान का प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंचेगा और शांति वार्ता में हिस्सा लेगा. ट्वीट में इजराइल पर युद्धविराम तोड़ने का आरोप भी लगाया गया था, लेकिन कुछ ही देर बाद यह ट्वीट हटा लिया गया. दो सप्ताह के युद्धविराम के बाद यह वार्ता बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जो शुक्रवार को होनी है. इस पहल को क्षेत्र में शांति बहाली की दिशा में एक अहम कदम के रूप में देखा जा रहा है.
पाकिस्तान में ईरान के राजदूत ने की वार्ता में भागीदारी की पुष्टि
इससे पहले पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रजा अमीरी मोघदम ने सोशल मीडिया पोस्ट कर इस वार्ता में भागीदारी की पुष्टि करते हुए लिखा- इजराइल द्वारा कथित युद्धविराम उल्लंघनों ने ईरानी जनता के बीच शांति वार्ता को लेकर संदेह पैदा कर दिया है. इसके बावजूद ईरान इस पहल को गंभीरता से ले रहा है और 10 बिंदुओं के प्रस्ताव के आधार पर बातचीत करेगा.
इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच होगी बातचीत
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका और ईरान दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों को 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में आमंत्रित किया है, ताकि बातचीत के जरिए स्थायी समाधान तलाशा जा सके. इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने पाकिस्तान के प्रस्ताव पर ईरान के साथ दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति जताई है.
जेडी वेंस कर सकते अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के भी इस्लामाबाद पहुंचने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि उनके आगमन का समय अभी स्पष्ट नहीं है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर सकते हैं.
जंग में मारे जा चुके ईरान के कई शीर्ष कमांडर
गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर संयुक्त हमले के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया था. इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई शीर्ष कमांडरों की मौत हो गई थी. जवाब में ईरान ने भी तगड़ा पलटवार किया, जिससे पूरा खाड़ी क्षेत्र संघर्ष की चपेट में आ गया. अब सबकी नजरें शुक्रवार को होने वाली इस अहम बैठक पर टिकी हैं, जो तय करेगी कि मध्य-पूर्व में तनाव घटेगा या टकराव और बढ़ेगा.
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