I-PAC Raid Case : नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उच्चतम न्यायालय से बृहस्पतिवार को कहा कि वह तृणमूल कांग्रेस के चुनावी कार्य का जिम्मा संभाल रहे प्रतीक जैन के कार्यालय में कुछ अनधिकृत व्यक्तियों के घुसने की सूचना मिलने के बाद आई-पैक परिसर गईं थीं। बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ से कहा कि उनकी मुवक्किल ‘इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी’ (आई-पैक) के परिसर में मुख्यमंत्री की हैसियत से नहीं, बल्कि तृणमूल की अध्यक्ष के रूप में गई थीं।

पार्टी ने 2021 में आई-पैक के साथ एक औपचारिक अनुबंध किया था : सिब्बल
सिब्बल ने कहा, आई-पैक पश्चिम बंगाल में चुनावों का काम देखता है। पार्टी ने 2021 में आई-पैक के साथ एक औपचारिक अनुबंध किया था।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) को इसके बारे में पता है। आई-पैक के पास डेटा की एक श्रृंखला रखी है। सिब्बल ने कहा कि जब ईडी की टीम वहां गई, तो उसे पता था कि पार्टी का बहुत सा डेटा वहां होगा। उन्होंने कहा, ‘‘चुनाव के बीच वहां जाने की जरूरत क्यों थी? कोयला घोटाले में आखिरी बयान 24 फरवरी 2024 को दर्ज हुआ था।’’ सिब्बल ने कहा, ‘‘तब से वे क्या कर रहे थे? चुनावों के बीच इतनी जल्दबाजी क्यों? अगर आप सूचना अपने कब्जे में ले लेंगे, तो हम चुनाव कैसे लड़ेंगे?’’ उन्होंने कहा कि तृणमूल अध्यक्ष को वहां जाने का अधिकार था।
सिब्बल ने कहा, ‘ईडी को पार्टी कार्यालय के उस हिस्से में जाने की क्या जरूरत है, जहां सारी जानकारी मौजूद है?’’ ईडी की याचिका के सुनवाई योग्य होने पर सवाल उठाते हुए सिब्बल ने कहा कि इस मामले की सुनवाई कलकत्ता उच्च न्यायालय में होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव नजदीक आने पर जांच के नाम पर ईडी द्वारा हस्तक्षेप करने का एक चलन बन चुका है। सिब्बल ने कहा, ‘‘उच्च न्यायालय संविधान के अनुच्छेद 226 संबंधी अधिकार क्षेत्र के तहत इस पर सुनवाई कर सकता है। यही क्रम है। वे समानांतर कार्यवाही दायर कर रहे हैं।’’ उन्होंने बनर्जी द्वारा दखलअंदाजी किए जाने और बाधा डाले जाने के ईडी के आरोप का खंडन करते हुए कहा, ‘‘मुख्यमंत्री द्वारा सभी उपकरण ले जाए जाने का आरोप झूठा है। इसकी पुष्टि उनके अपने पंचनामे से होती है। यह सिर्फ पूर्वाग्रह पैदा करने के लिए है।’’

सुप्रीम कोर्ट ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी पर रोक लगाई
राज्य सरकार और पुलिस अधिकारियों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि मुख्यमंत्री को ‘जेड प्लस’ श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है इसलिए जब वह आई-पैक परिसर में दाखिल हुईं तो उनके साथ जाना पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कुमार का कर्तव्य था। न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय के इस आरोप को ‘‘बेहद गंभीर’’ बताया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उसकी जांच में ‘‘बाधा पैदा की’’। न्यायालय ने इस बात की समीक्षा करने पर सहमति जताई कि क्या किसी राज्य की कानून प्रवर्तन एजेंसियां किसी गंभीर अपराध के मामले में केंद्रीय एजेंसी की जांच में हस्तक्षेप कर सकती हैं।
न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में उन ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी पर रोक लगा दी है जिन्होंने आठ जनवरी को आई-पैक कार्यालय और इसके निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर छापा मारा था। उसने राज्य पुलिस को छापेमारी की कार्रवाई के सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत में ईडी की यह याचिका आठ जनवरी की उन घटनाओं के बाद दायर की गई है जब कोयला तस्करी मामले से जुड़ी जांच के सिलसिले में साल्टलेक स्थित आई-पैक के कार्यालय और कोलकाता में जैन के आवास पर ईडी के छापों के दौरान जांच एजेंसी के अधिकारियों को बाधाओं का सामना करना पड़ा था। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी परिसर में दाखिल हुईं और जांच से संबंधित ‘‘महत्वपूर्ण’’ साक्ष्य अपने साथ ले गईं। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय एजेंसी पर अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने का आरोप लगाया है और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने ईडी की जांच में ‘‘बाधा डालने’’ के आरोप से इनकार किया है। राज्य पुलिस ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की है।




