Holika Dahan 2026 Muhurat and Date Rajasthan: जयपुर सहित पूरे राजस्थान में रंगों और खुशियों का पर्व होली-धुलंडी इस बार 2 और 3 मार्च को मनाया जाएगा। शहर के प्रमुख धार्मिक स्थल गोविंददेव जी मंदिर में भी होली 2 मार्च को ही उत्साहपूर्वक मनाई जाएगी। ज्योतिषविदों के अनुसार 2 मार्च की शाम 5:56 बजे से अगले दिन सुबह 5:32 बजे तक भद्रा रहेगा, वहीं पूर्णिमा की शुरुआत भी शाम 5:56 बजे से हो रही है। शास्त्रों के अनुसार इस स्थिति में भद्रा पुच्छ काल के समय मध्यरात्रि के बाद होलिका दहन करना शुभ रहेगा। इस कारण इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च की मध्यरात्रि के बाद किया जाएगा।
सिटी पैलेस में भी होलिका दहन 2 मार्च को होगा
जयपुर के पूर्व राजपरिवार की ओर से सिटी पैलेस में भी होलिका दहन 2 मार्च की मध्यरात्रि में आयोजित होगा। परंपरा अनुसार सबसे पहले यहां होलिका दहन किया जाएगा और उसके बाद शहरभर में होली की उमंग फैलेगी। ज्योतिषाचार्य प. अनिल कुमार विद्रोही के अनुसार, 3 साल बाद होलिका दहन गोधूलि बेला के बजाय मध्यरात्रि बाद होगा। 2 मार्च को पूर्णिमा तिथि शाम 5:56 बजे से अगले दिन शाम 5:08 बजे तक रहेगी। शास्त्रों के अनुसार प्रदोष काल में पूर्णिमा होने के कारण, भद्रा पुच्छ काल में मध्यरात्रि बाद ही होलिका दहन करना श्रेष्ठ माना गया है। इस वर्ष होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रात 1:26 बजे से 2:38 बजे तक रहेगा।
राजस्थान में 3 मार्च को धुलंडी का पर्व मनाया जाएगा
पं. विद्रोही के अनुसार, बिहार, झारखंड, असम, दिल्ली, यूपी और पंजाब में इस वर्ष पर्व 3 और 4 मार्च को मनाया जा रहा है। भद्रा काल को क्रोध और विघ्न का समय माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे शुभ कार्य नहीं करने चाहिए। भद्रा शनिदेव की बहन मानी जाती हैं और उनका स्वभाव उग्र होता है। वहीं 2 मार्च की मध्यरात्रि के बाद होलिका दहन होने के कारण 3 मार्च को राजस्थान में धुलंडी का पर्व मनाया जाएगा। परंपरा के अनुसार दहन के बाद सूर्योदय पर ही धुलंडी का उत्सव आयोजित किया जाता है।
3 मार्च को लगने वाला ग्रहण बना कारण
वहीं होली की तारीख को लेकर इस बार लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इसकी वजह है 3 मार्च को लगने वाला चंद्रग्रहण। इसी कारण दहन और धुलंडी की तिथि को लेकर अलग-अलग मत सामने आए हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, 2 मार्च की देर रात भद्रारहित समय में होलिका दहन किया जाएगा। कई जगह 3 मार्च को ग्रहण के कारण होली नहीं खेली जाएगी। ग्रहण समाप्ति के बाद 4 को धुलंडी मनाई जाएगी।
स्पष्ट रूप से दिखाई देगा चंद्र ग्रहण
3 मार्च को चंद्रग्रहण भारत में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। ग्रहण दोपहर 3 बजकर 21 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण और सूतक काल में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। इसी कारण सूतक और ग्रहण के प्रभाव में रंग-गुलाल खेलना भी शुभ नहीं माना जाता। 2 मार्च को प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा होने के कारण होलिका दहन इसी दिन किया जाएगा। विद्वानों के अनुसार, इस बार 2 मार्च को रात 1.26 बजे से 2.38 बजे तक का समय होलिका दहन के लिए सबसे उत्तम रहेगा।
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