प्रतीक चौवे, संपादक
होली रंगभरी खुशियों का उत्सव है। फाल्गुन की बयार के साथ ढोलक की थाप पर फाग गूंज रहा है। देशभर में रंगों की फुहार उड़ रही है। जयपुर से मथुरा-वृंदावन हो या काशी से केदारनाथ तक, रंगाें के इस पर्व का उल्लास छाया हुआ है। उत्साह से चमकते चेहरे ‘होलिका दहन’ कर बुराई पर अच्छाई की विजय में शामिल होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। बरसों से चली आ रही इस परंपरा के तहत गली-मोहल्ले-चौराहों पर होलिका दहन की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। होलिका दहन इस बार देर रात को होगा। होली कब है, यह सवाल घर-दफ्तर ही नहीं बाजार से लेकर गांव-गांव तक हर कोई पूछता नजर आ रहा है। सोशल मीडिया पर भी खूब चला। हालांकि, अधिकतर ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि दो मार्च को होलिका दहन के बाद तीन को चंद्रग्रहण है, इसलिए चार को रंगोत्सव मनाया जाए। बहरहाल रंगोत्सव हो सकता है कि दो के बजाय तीन दिन तक चले। कुछ साल पहले तक होली का हुड़दंग महीने भर पहले शुरू हो जाता था। भागमभाग बढ़ी तो होली भी दो-चार दिन तक सिमट कर ही रह गई। यह भी अच्छा है कि उत्सव को लेकर उत्साह पहले जैसा है। इस पर्व पर आधुनिकता का रंग भले ही चढ़ गया पर गुलाल की पुड़िया, घर की बनी गुझिया, ढोलक की थाप और पड़ोसियों के साथ खुलकर हंसी-ठिठोली का पुराना अंदाज अब भी बरकरार है। समय के साथ त्योहारों का रंग-ढंग बदलना स्वाभाविक है, और होली भी इससे अछूती नहीं रही। कभी यह पर्व सीमित साधनों, घर में बने रंगों और मोहल्ले की आत्मीयता के साथ सादगी से मनाया जाता था। आज बाजारवाद तेज रफ्तार जिंदगी और दिखावे की संस्कृति ने इसकी बाहरी चमक तो बढ़ा दी है, लेकिन उस सहज सादगी में कुछ कमी जरूर आई है। फिर भी संतोष की बात यह है कि होली के मूल में बसे प्रेम और उल्लास की भावना आज भी जीवित है। होली ऐसा उत्सव है, जो केवल रंगों की मस्ती तक सीमित नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने वाली परंपरा का प्रतीक है। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि जीवन की व्यस्तता और मतभेदों के बीच भी प्रेम, क्षमा और मेल-मिलाप के लिए जगह हमेशा बनी रहनी चाहिए। बदलते दौर में जब सामाजिक दूरी और मानसिक तनाव बढ़ रहे हैं, तब होली का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। होली में रासायनिक रंगों का अंधाधुंध प्रयोग बढ़ रहा है जो वाकई गलत है। नशे में हुड़दंग और जबरन रंग लगाने पर लड़ाई-झगड़ा भी अक्सर रंग में भंग डालता है। होलिका दहन हमें अपने भीतर की नकारात्मकता, अहंकार और कटुता को जलाने का संदेश देता है, जबकि धुलंडी का रंगोत्सव जीवन में नई शुरुआत की उम्मीद जगाता है। होली का असली रंग वही है, जो दिलों में घुलता है। इस पर्व को प्रेम, संयम और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ मनाएं, यह केवल एक-दो दिन का उत्सव नहीं, बल्कि समाज को जोड़े रखने की महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रंगों के इस पर्व पर मस्ती में डूबिए, खुलकर धमाल मचाइए और खुशियों से भीग जाइए। दूरियां मिटाइए, रिश्ते मजबूत करने को भी रंग लगाइए।
जागो इण्डिया जागो के पाठकों को
रंगोत्सव पर हार्दिक बधाई




