Sunday, March 22, 2026
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Gangaur Festival Jaipur: जयपुर में निकली गणगौर माता की शाही सवारी, हेलीकॉप्टर से हुई फूलों की वर्षा

राजस्थान में लोकपर्व गणगौर पूरे उत्साह के साथ मनाया गया। राजधानी जयपुर में गणगौर माता की ऐतिहासिक शाही सवारी निकाली गई, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग और पर्यटक उमड़े।

Gangaur Festival Jaipur: राजस्थान में लोकपर्व गणगौर पूरे उत्साह के साथ मनाया गया। राजधानी जयपुर में गणगौर माता की ऐतिहासिक शाही सवारी निकाली गई, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग और पर्यटक उमड़े।

त्रिपोलिया गेट से तालकटोरा तक निकली सवारी

जयपुर। गणगौर माता की शाही सवारी सिटी पैलेस के त्रिपोलिया गेट से शुरू होकर तालकटोरा तक पहुंची। इस दौरान गणगौर माता की मूर्ति की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। इस वर्ष आरती शाही परिवार से जुड़े पुजारी द्वारा की गई, जिससे आयोजन की भव्यता और बढ़ गई।

हेलीकॉप्टर से हुई फूलों की वर्षा

सवारी के दौरान हेलीकॉप्टर से फूलों की वर्षा की गई, जिसे देखकर दर्शकों ने तालियां बजाकर उत्साह व्यक्त किया। पूरे मार्ग में भक्तों और पर्यटकों की भारी भीड़ देखने को मिली।

हालांकि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को व्यवस्था संभालनी पड़ी और वीडियो बना रहे कुछ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को हटाया गया।

लोक नृत्यों ने बढ़ाई रंगत

इस आयोजन में प्रदेशभर से आए लोक कलाकारों ने ‘कच्छी घोड़ी’, ‘गैर’, ‘कालबेलिया’, ‘चरी’ और ‘घूमर’ जैसे पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किए। इससे राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली। विदेशी पर्यटक भी इस आयोजन को देखकर खासे उत्साहित नजर आए।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी लाइव प्रसारण

इस बार गणगौर सवारी को डिजिटल मंचों से भी जोड़ा गया। ‘राजस्थान फाउंडेशन’ के माध्यम से प्रवासी राजस्थानियों के लिए लाइव स्ट्रीमिंग की व्यवस्था की गई। वहीं पर्यटन विभाग ने भी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया।

संस्कृति और आस्था का प्रतीक है गणगौर

पर्यटन विभाग के अधिकारियों के अनुसार गणगौर केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि राजस्थान की संस्कृति और परंपराओं को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। यह त्योहार महिलाओं की आस्था, वैवाहिक सुख और भगवान शिव-पार्वती के प्रति भक्ति का प्रतीक माना जाता है।

उदयपुर में भी निकली सवारी

उदयपुर में भी घंटाघर से गणगौर घाट तक पारंपरिक सवारी निकाली गई। महिलाओं और पुरुषों ने पारंपरिक वेशभूषा में भाग लिया और विधि-विधान से पूजा की। इस दौरान शाही नाव की सवारी भी आकर्षण का केंद्र रही।

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