Thursday, March 26, 2026
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Jaishankar France Visit 2026 : वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच जयशंकर पहुंचे फ्रांस, G7 मंच पर Strait of Hormuz खोलने पर होगी चर्चा

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Jaishankar France Visit 2026 : नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस जयशंकर जी7 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए बृहस्पतिवार को फ्रांस रवाना हुए। इस बैठक में पश्चिम एशिया संकट पर चर्चा होगी और होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए खुला रखने के प्रयासों में समन्वय पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। हालांकि भारत जी7 का सदस्य नहीं है लेकिन इस प्रभावशाली समूह के मौजूदा अध्यक्ष फ्रांस ने उसे साझेदार देश के रूप में आमंत्रित किया है। इस बैठक में अमेरिका, कनाडा, जर्मनी, इटली, फ्रांस, जापान और ब्रिटेन के शीर्ष राजनयिक हिस्सा ले रहे हैं।

G7 बैठक में उठेगा पश्चिम एशिया तनाव का मुद्दा, S. Jaishankar भी होंगे शामिल

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, विदेश मंत्री 26 और 27 मार्च को फ्रांस में एबे डेस-वॉक्स-डे-सेर्ने की यात्रा करेंगे, जहां वह साझेदार देशों के साथ जी7 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगे। बयान में कहा गया कि जयशंकर जी7 बैठक से इतर अपने समकक्षों के साथ संभवत: द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे। फ्रांस ने भारत के अलावा सऊदी अरब, दक्षिण कोरिया और ब्राजील को भी आमंत्रित किया है।

फ्रांस के एक अधिकारी के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट पर एक अलग सत्र आयोजित किया जाएगा। अधिकारी ने कहा कि मंत्री इस क्षेत्र में तनाव कम करने और समुद्री मार्ग फिर से खोलने के लिए विभिन्न वार्ता माध्यमों की तलाश करने पर विचार-विमर्श करेंगे। अधिकारी ने कहा कि विदेश मंत्री इस बात पर भी चर्चा करेंगे कि ‘‘ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक कार्यक्रम से कैसे निपटा जाए।’’

ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग अवरुद्ध कर दिए जाने के बाद से वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की कीमतों में उछाल आया है। यह फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच एक संकरा नौवहन मार्ग है, जिससे दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) की आवाजाही होती है। पश्चिम एशिया, भारत की ऊर्जा खरीद का एक प्रमुख स्रोत रहा है।

पिछले कुछ सप्ताह में भारत ने पश्चिम एशिया में संघर्ष को जल्द से जल्द समाप्त कराने और होर्मुज जलडमरूमध्य से ऊर्जा आपूर्ति का निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करने पर केंद्रित कूटनीतिक प्रयास किए हैं। भारत का मानना है कि यदि इस नौवहन मार्ग पर अवरोध जारी रहा तो भारत सहित कई देशों की ईंधन और उर्वरक सुरक्षा पर इसके गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं।

जी7 दुनिया की सात सबसे उन्नत अर्थव्यवस्थाओं कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका का समूह है। यूरोपीय संघ भी इसका सदस्य है। जी7 अपने सदस्य देशों के लिए ऐसा प्रमुख मंच है जहां वे वैश्विक स्तर पर मौजूद प्रमुख आर्थिक, वित्तीय और भू-राजनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए चर्चा और समन्वय करते हैं।

Mukesh Kumar
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