Thursday, March 5, 2026
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भर्ती-प्रमोशन के बाद भी दूर नहीं हो पा रही पुलिसकर्मियों की तंगी

प्रमोशन पाकर प्रफुल्लित पुलिसकर्मी अपनी पुरानी कुर्सी पर काबिज हैं। नफरी की तंगी बरकरार है। नए तो छोड़िए पुराने थानों की दशा में भी कोई खास सुधार नहीं हो पाया है। अपराध दिन दूना रात चौगुना बढ़ रहा है। कई बड़ी वारदातें खुल नहीं पा रहीं।

प्रतीक चौवे, संपादक
प्रमोशन पाकर प्रफुल्लित पुलिसकर्मी अपनी पुरानी कुर्सी पर काबिज हैं। नफरी की तंगी बरकरार है। नए तो छोड़िए पुराने थानों की दशा में भी कोई खास सुधार नहीं हो पाया है। अपराध दिन दूना रात चौगुना बढ़ रहा है। कई बड़ी वारदातें खुल नहीं पा रहीं। पुलिस के बड़े अधिकारी बार-बार यही कहते हैं, भर्ती हो रही है-जल्द किल्लत दूर हो जाएगी। हालत यह है कि कई एएसआई-एसआई एसपी ऑफिस या अन्य आरामदायक ड्यूटी में लगे हुए हैं।

थानों में पहले की तरह एएसआई के पद खाली पड़े हैं जबकि काफी संख्या में हेड कांस्टेबल पदोन्नत होकर एएसआई बने हैं। इसके बाद भी उन्हें फील्ड पोस्टिंग नहीं दी गई, उन्हें थानों में नहीं लगाया जा रहा। राजनीतिक सिफारिश कहें या अन्य कोई कारण, अन्य कोई वजह। जिम्मेदार अफसर भी इसे नजरअंदाज कर रहे हैं। यह सही है कि पुलिसकर्मियों की भारी संख्या में कमी है, पर यह कमी कब तक बनी रहेगी। बरसों से यही सुनते आ रहे हैं। थानों के साथ चौकियां बढ़ीं, आबादी भी बढ़ी और भर्ती भी खूब हुई पर पुलिसकर्मियों की किल्लत अब तक बरकरार है, आखिर इसका क्या कारण है? राजस्थान में कई पुलिस थानों और चौकियों पर स्वीकृत पदों के मुकाबले काफी कम पुलिसकर्मी तैनात हैं।

कई जगह एक ही पुलिसकर्मी को कई-कई जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। थानों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराधों की जांच करने, वीआईपी ड्यूटी निभाने और त्योहारों या आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था संभालने जैसे कई काम एक साथ करने पड़ते हैं। ऐसे में पुलिसकर्मियों पर अत्यधिक कार्यभार पड़ना स्वाभाविक है। इसका यह मतलब नहीं कि आमजन के साथ न्याय ही नहीं हो। उसको जरूरत पड़ने पर पुलिस मदद नहीं करे या फिर अपराध करने वालों को इसलिए नहीं पकड़ा जाए कि पुलिस के पास और भी कई काम हैं। यह भी बताना जरूरी है कि कई पुलिसकर्मी थानों में ड्यूटी करना ही नहीं चाहते। इसके लिए वो जोड़-जुगाड़ करके पुरानी जगह ही बने रहते हैं। थाने में दर्ज होने वाले अधिकतर मामलों की प्रारंभिक जांच, कागजी कार्रवाई, शिकायतों का निस्तारण और कई प्रशासनिक जिम्मेदारियां एएसआई के जिम्मे होती हैं।

मजे की बात यह है कि ये ही पद सबसे ज्यादा खाली हैं। एसपी ऑफिस समेत अन्य कामकाज में तैनात कई एएसआई ऐसे भी हैं जिनकी जरुरत वहां होती ही नहीं। कानून व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने और आम जनता को त्वरित न्याय दिलाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी पुलिस पर होती है। जब किसी व्यक्ति के साथ अन्याय होता है या वह किसी परेशानी में घिरता है तो सबसे पहले पुलिस की शरण में ही जाता है। ऐसे में उसकी यही अपेक्षा रहती है कि उसकी शिकायत पर तुरंत कार्रवाई हो और उसे न्याय मिले। कई मामलों की जांच लंबित रहती है और शिकायतों के निस्तारण में देरी होती है।

इससे पीड़ितों में निराशा और आम लोगों में असंतोष पैदा होता है। यह तो सरकार को भी सोचना चाहिए कि पुलिसकर्मियों की किल्लत क्यों नहीं खत्म होती। हर बार यह कहना कि स्टाफ कम है, काम ज्यादा है, इसलिए आरोपी नहीं मिले या मामले की जांच पेंडिंग है, जनता को सुनने में अब अटपटा सा लगने लगा है। असल में मजबूत और सक्षम पुलिस व्यवस्था ही आम जनता को सुरक्षा का भरोसा देती है। जब पुलिस सशक्त होगी तो अपराध पर नियंत्रण भी बेहतर होगा। यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वो पुलिस की तंगी दूर कर आमजन को राहत दे।

Prateek Chauvey
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माननीय प्रतीक चौबे जी(Prateek Chauvey ) द्वारा प्रस्तुत यह मंच जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और प्रेरणा भरने का प्रयास है। यहाँ दी गई जानकारी आपकी व्यक्तिगत और व्यावसायिक यात्रा में सहायक होगी, आपको नई सोच के साथ बदलाव और सफलता की ऊँचाइयों तक पहुँचने के लिए प्रेरित करेगी।
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