नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के अयोग्य घोषित कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती ने धोखाधड़ी के आरोपों के तहत सुनाई गई तीन साल की कैद की सजा के खिलाफ आज दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। भारती को 1998 से 2011 के बीच बैंक रिकॉर्ड में जालसाजी कर अवैध ब्याज प्राप्त करने के मामले में दोषी पाया गया था। दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ भारती की अपील पर अभियोजन पक्ष को नोटिस जारी किया। मामले की सुनवाई अब 15 अप्रैल को होगी।
यह मामला 2 अप्रैल को तब सुर्खियों में आया था जब अदालत ने जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक, दतिया के पूर्व अध्यक्ष भारती को दोषी मानते हुए तीन साल कैद की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष ने बताया कि भारती की दिवंगत मां, सावित्री, ने 24 अगस्त 1998 को परिवार के ट्रस्ट के नाम पर बैंक में 10 लाख रुपये की तीन साल की सावधि जमा की थी, जिस पर 13.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज निर्धारित था।
अभियोजन ने आरोप लगाया कि भारती और अन्य आरोपी उच्च ब्याज दर के भुगतान की अवधि बढ़ाने और बैंक रिकॉर्ड में छेड़छाड़ करने की योजना बना रहे थे। उन्होंने सावधि जमा की अवधि को पहले 10 और फिर 15 साल तक बढ़ा दिया, जिससे ट्रस्ट को 2011 तक लगातार ब्याज प्राप्त होता रहा, जबकि वास्तविक ब्याज दरें काफी कम हो चुकी थीं।
मामले में बताया गया कि भारती ट्रस्ट के न्यासी थे और इस प्रक्रिया में उन्होंने लगभग 18.5 लाख रुपये अवैध ब्याज के रूप में प्राप्त किए। भारती की ओर से यह अपील अदालत में न्याय की मांग के रूप में दायर की गई है। अब अदालत इस मामले में निचली अदालत के फैसले की समीक्षा करेगी और अंतिम निर्णय सुनाएगी।
यह घटना राज्य राजनीति में विधायकों की जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन पर नए सवाल खड़े करती है।



