Monday, March 16, 2026
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जीती जंग : कतर की अदालत ने आठ भारतीय नागरिकों की मौत की सजा कम की, विदेश मंत्रालय के प्रयास रंग लाए, सभी पूर्व नौसैनिकों पर लगाया जासूसी का आरोप

नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि कतर की एक अदालत ने जासूसी के एक कथित मामले में भारतीय नौसेना के आठ पूर्व कर्मियों को सुनायी गयी मौत की सजा को कम कर दिया है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘हमने ‘दहारा ग्लोबल’ मामले में कतर की अपीलीय अदालत के आज के फैसले पर गौर किया, जिसमें सजा कम कर दी गई है।’ नौसेना के आठ पूर्व कर्मियों को जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और कतर की एक अदालत ने अक्टूबर में उन्हें मौत की सजा सुनायी थी।

सभी भारतीय नागरिक दोहा स्थित ‘दहारा ग्लोबल’ कंपनी के कर्मचारी थे और उन्हें अगस्त 2022 में हिरासत में लिया गया था। उनके खिलाफ आरोपों को कतर के अधिकारियों ने सार्वजनिक नहीं किया था। भारत ने पिछले महीने इस सजा के खिलाफ कतर में अपीलीय अदालत का दरवाजा खटखटाया था। कतर में जिन 8 पूर्व नौसेना अफसरों को मौत की सजा सुनाई गयी थी उनके नाम हैं- कैप्टन नवतेज सिंह गिल, कैप्टन सौरभ वशिष्ठ, कैप्टन बीरेंद्र कुमार वर्मा, कमांडर पूर्णेन्दु तिवारी, कमांडर सुग्नाकर पकाला, कमांडर संजीव गुप्ता, कमांडर अमित नागपाल और सेलर रागेश।

विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, ‘कतर में हमारे राजदूत और अन्य अधिकारी परिवार के सदस्यों के साथ आज अपीलीय अदालत में मौजूद थे। हम मामले की शुरुआत से ही उनके साथ खड़े हैं और हम उन्हें सभी कांसुलर और कानूनी सहायता देना जारी रखेंगे। हम इस मामले को कतर के अधिकारियों के समक्ष भी उठाते रहेंगे।’’

मंत्रालय ने कहा कि विस्तृत फैसले की प्रतीक्षा है और वह अगले कदम के बारे में फैसला करने के लिए कानूनी टीम के साथ-साथ परिवार के सदस्यों के साथ संपर्क में है। उसने कहा, ‘इस मामले की कार्यवाही की प्रकृति गोपनीय और संवेदनशील होने के कारण, इस समय कोई और टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।’’

ये सभी कतर में दाहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजीज एंड कंसल्टेंसी नाम की निजी कंपनी में काम करते थे। यह कंपनी डिफेंस सर्विस प्रोवाइड करती है। ओमान एयरफोर्स के रिटायर्ड स्क्वॉड्रन लीडर खमिस अल अजमी इसके प्रमुख हैं. उन्हें भी 8 भारतीय नागरिकों के साथ गिरफ्तार किया गया था, लेकिन नवंबर में उन्हें छोड़ दिया गया था।

कई बार खारिज हुई जमानत याचिकाएं

आठ लोगों की जमानत याचिकाएं कई बार खारिज की जा चुकी हैं। भारत सरकार ने कतर की अदालत के फैसले पर हैरानी जाहिर की थी। सरकार ने कहा था कि उन्हें छुड़ाने के लिए कानूनी रास्ते खोजे जा रहे हैं। विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि हम जजमेंट की डिटेलिंग का इंतजार कर रहे हैं।

विदेश मंत्री ने कर्मियों के परिवार वालों से की थी मुलाकात

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इन लोगों के परिवारों से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा था कि वह उनका दर्द और चिंता समझ सकते हैं। जयशंकर ने कहा था कि सरकार आठों लोगों की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए सभी कोशिशें कर रही हैं।

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