Tuesday, March 31, 2026
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Jaipur High Tech Museum : जयपुर में ASI का पहला हाईटेक म्यूजियम तैयार, टिकट भी नहीं लगेगा

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण में जयपुर अपना पहला हाईटेक म्यूजियम तैयार किया है, जहां उत्खनन से मिली करीब 800 पुरावस्तुओं को प्रदर्शित किया जाएगा। मानसरोवर स्थित इस म्यूजियम में एलईडी, टच स्क्रीन, क्यूआर कोड और हेडफोन के जरिए दर्शकों को ऐतिहासिक जानकारी दी जाएगी। अप्रैल-मई में इसके उद्घाटन की संभावना है और खास बात यह है कि आमजन और विद्यार्थियों के लिए इसमें प्रवेश पूरी तरह निशुल्क रहेगा।

मनीष कुमार शर्मा

Jaipur High Tech Museum : जयपुर। कालीबंगा…मोहनजोदड़ो…या फिर गणेश्वर सभ्यता के बारे में आपने किताबों में पढ़ा होगा…लेकिन जब ऐसे ही हैरिटेज साइट्स के बारे में प्रत्यक्ष रूप से देखने और जानने का मौका मिले तो…यह सफर कितना रोमांचक होगा…अब यह सपना केवल कल्पना नहीं, बल्कि हकीकत बनने वाला है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण(एएसआई) ने हैरिटेज साइट्स और उत्खनन में निकली पुरावस्तुओं को जयपुर में प्रदर्शित करने की योजना बना ली है। इसके लिए जयपुर में एएसआई का पहला हाईटेक म्यूजियम तैयार है, जो प्रत्येक जयपुरवासी के लिए गौरवान्वित करने वाला है।

दरअसल, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) ने जयपुर क्षेत्र में हाईटेक म्यूजियम बनाया है। मानसरोवर के पटेल मार्ग स्थित कार्यालय की पहली मंजिल पर बने इस म्यूजियम में डीग जिले के बहज सहित अन्य जगहों से उत्खनन में प्राप्त विभिन्न पुरावस्तुओं को प्रदर्शित किया गया है। इसके पीछे उद्देश्य केवल आमजन को ऐतिहासिक वस्तुओं से रूबरू कराना है। इसके लिए यहां आठ शोकेस में लगभग 800 पुरावस्तुओं को आकर्षण तरीके से प्रदर्शित किया गया है। बताया जा रहा है कि अप्रैल या मई की शुरुआत में इसका शुभारंभ होने की उम्मीद है। जिसके बाद यह आमजन के अवलोकनार्थ खोल दिया जाएगा। सबसे खास बात यह है कि इसके लिए यहां कोई टिकट शुल्क भी नहीं लिया जाएगा।

एलईडी और टच स्क्रीन से मिलेगी पुरावस्तुओं की जानकारी

म्यूजियम की सबसे खास बात यह है कि इसमें आधुनिकता का समावेश किया गया है। करीब 25 लाख रुपए की लागत से बने इस म्यूजिमय में आमजन और स्कूली बच्चों को इतिहास से रूबरू करवाने के लिए टच स्क्रीन कियोस्क सहित एलईडी टीवी लगाए गए हैं। साथ ही, स्पीकर, क्यूआर कोड और हैडफोन की व्यवस्था भी की जा रही हैं। इसके माध्यम से यहां आने वाले टूरिस्ट और विद्यार्थी पुरातात्विक स्थलों और उनसे जुड़ी वस्तुओं की पूरी जानकारी देख भी सकेंगे और पढ़ भी सकेंगे। मूक-बधिर के लिए साइन लैंग्वेज में जानकारी देने की भी तैयारी है। यदि कोई ग्रुप में यहां विजिट करना चाहे तो 30—40 लोगों के बैठने की व्यवस्था भी रहेगी। साथ ही, रणथंभौर की डॉक्यूमेंट्री, भानगढ़ और नीलकंठ का वर्चुअल टूर, बयाना व आभानेरी के बारे में जानकारी दी जाएगी।

बहज उत्खनन के बारे में खास बातें

एएसआई से मिली जानकारी के अनुसार अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ.विनय कुमार गुप्ता के निर्देशन में वर्ष 2024 और 2025 में पवित्र गोवर्धन पहाड़ियों के पास स्थित बहज में उत्खन्न कार्य किया गया। इस स्थल से ऐसे प्रमाण प्राप्त हुए हैं जो भारतीय पुरातत्व और कला इतिहास की विभिन्न प्रचलित अवधारणाओं को बदल सकते हैं। यहां से करीब 5 हजार पुरावस्तुएं उत्खनन में मिली है। जिनमें से कुछ डीग संग्रहालय में भी प्रदर्शित की गई हैं। यह स्थल महत्वपूर्ण चित्रित धूसर मृद्भांड(पीजीडब्ल्यू) संस्कृति पर प्रकाश डालता है। यहां से महाभारत कालखंड से जुड़े, गुप्त काल, कुषाण, शुंग,मौर्य, मौर्य-पूर्व संस्कृति भी जानकारी मिलती है।

म्यूजियम में ये पुरावस्तुएं प्रदर्शित

बहज उत्खनन में मिली पुरावस्तुओं में तांबे, लोहे और हड्डियों से बने औजार, जैस्पर पत्थर की स्टोन रिंग, पीजीडब्ल्यू काल की मिट्टी की सीलें, टेराकोटा बर्तन, कुषाण काल की नृसिंह मूर्ति, जैस्पर से बनी प्रारंभिंक मौर्य काल की मुहर, धातु के उपकरण, नवग्रह, सप्तऋषि, शनिदेव और अश्विनीकुमार के अंकण, सोने—चांदी के प्राचीनतम सिक्के, शंख और कांच की चूड़ियां, भगवान नृसिंह और शिव-पार्वती की प्राचीन मूर्तियां, पत्थर की मुद्राएं, पुरापाषाण काल के औजार सहित कई प्राचीन वस्तुएं मिली हैं, जिन्हें म्यूजियम में प्रदर्शित किया गया है।

इनसाइड स्टोरी आफ म्यूजियम

कहते हैं कि अगर आप सपने देख सकते हैं तो उसे पूरा भी कर सकते हैं…इसके लिए आपकी दृढ़ इच्छाशक्ति, परिश्रम और निरंतरता जरूरी है। ऐसा ही देखने को मिला इस म्यूजियम को बनाने की कहानी में। जानकारी के अनुसार जयपुर मंडल कार्यालय के अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ.विनय कुमार गुप्ता ने वर्ष 2022 में जब पदभार संभाला तो यहां पहली मंजिल पर हॉल को म्यूजियम में बदलने का सपना देखा। जिसके बाद यहां पुरावस्तुओं को एकत्र करने की सोची तो बहज उत्खनन साइट के रूप में ईश्वर का वरदान मिला। यहां करीब 5 हजार साल से लेकर 1700 साल पुरानी संस्कृति से जुड़ी पुरावस्तुएं मिलीं, जिन्हें यहां प्रदर्शित करने की योजना बनाई। कार्यालय खर्च में से ही कुछ राशि बनाकर म्यूजियम तैयार हुआ।

Mukesh Kumar
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