चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और टीवीके प्रमुख विजय ने गुरुवार को विधानसभा में ऐसा कदम उठाया, जिसने सदन की सामान्य व्यवस्था से अलग तस्वीर पेश की। मुख्यमंत्री की निर्धारित कुर्सी पर कुछ देर बैठने के बाद विजय अपनी सीट छोड़कर मंत्रियों के बीच जाकर बैठ गए। उनका यह अंदाज विधानसभा में मौजूद सदस्यों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया।
आमतौर पर तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री के लिए स्पीकर की कुर्सी के नजदीक अलग और बड़ी सीट निर्धारित रहती है। मंत्रियों के लिए सामने अलग पंक्ति होती है और उन्हें वरिष्ठता के क्रम में स्थान दिया जाता है। विपक्ष के नेता तथा विभिन्न दलों के विधायक दलों के नेता दूसरी ओर बैठते हैं।
गुरुवार दोपहर के सत्र में विजय ने इस परंपरागत व्यवस्था से हटकर मंत्रियों की पंक्ति में जगह ली। वह सदन के नेता और मंत्री केए सेंगोट्टैयन तथा आधव अर्जुन के बीच बैठे और उनके साथ बातचीत करते दिखाई दिए। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इससे पहले किसी मुख्यमंत्री के मंत्रियों के लिए निर्धारित सीट पर बैठने का ऐसा उदाहरण सामने नहीं आया था।
विजय दिन में कई सरकारी कार्यक्रमों में शामिल होने के बाद विधानसभा पहुंचे। सदन की कार्यवाही से इतर उनका प्रशासनिक कामकाज भी जारी रहा। इससे पहले उन्होंने नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बीच वहां फंसे तमिलनाडु के नागरिकों की सुरक्षित वापसी को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की थी।
नेपाल में दो अलग-अलग समूहों में तमिलनाडु से कुल 103 लोग पहुंचे थे। पहले दल में राज्य के 54 लोगों के साथ पुडुचेरी के तीन नागरिक शामिल थे, जबकि दूसरे समूह में तमिलनाडु के 49 लोग थे। बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए उनकी निकासी और राहत व्यवस्था की समीक्षा की गई।
सौ दिन से ज्यादा के कार्यकाल में कई घोषणाएं
मुख्यमंत्री पद संभालने के 100 दिन से अधिक समय में विजय सरकार ने कई अहम फैसलों और विधायी प्रस्तावों की घोषणा की है। इनमें दूध उत्पादकों, विधायकों, स्वास्थ्य व्यवस्था और महिला सरकारी कर्मचारियों से जुड़े फैसले शामिल हैं।
सरकार ने तीसरे बच्चे के जन्म पर मिलने वाली मातृत्व छुट्टी को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 365 दिन करने की घोषणा की है। वहीं, सरकारी डेयरी ब्रांड आविन के लिए दूध खरीद मूल्य 38 रुपये से बढ़ाकर 41 रुपये प्रति लीटर किया गया है। इससे 3.16 लाख से अधिक दूध उत्पादकों को लाभ मिलने का दावा किया गया है।
विधायकों के लिए भी सरकार ने नई व्यवस्था की घोषणा की है। इसके तहत सभी विधायकों को सरकारी वाहन और हर महीने एक लाख रुपये का पैकेज देने का प्रस्ताव रखा गया है। इसमें ईंधन, वाहन रखरखाव व चालक के खर्च के लिए 75 हजार रुपये और कार्यालय सहायक के लिए 25 हजार रुपये शामिल हैं।



