Iran US War: अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में अमेरिका के हमले और उसमें ईरानी पोत को भारी नुकसान पहुंचने से जारी संघर्ष और अधिक खतरनाक हो सकता है। ईरान ने इस हमले को अत्याचार बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है. ईरान की ओर से कहा गया कि “भारतीय नौसेना के मेहमान” पर हुए इस हमले की अमेरिका को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक जहाज पर करीब 180 लोग सवार थे, जिनमें से अब तक 32 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया था.
ईरानी विदेश मंत्री ने अमेरिकी कार्रवाई को बताया ज्यादती
ईरान के विदेश मंत्री ने अब्बास अराघची ने कहा कि श्रीलंका के तट पर एक अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा ईरानी नौसैनिक पोत को डुबोकर अमेरिका ने जो उदाहरण पेश किया है, उसे उस पर अत्यधिक पछतावा होगा. ईरानी विदेश मंत्री ने अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे समुद्र में की गई ज्यादती बताया और कहा कि यह घटना ईरान के तट से लगभग 2,000 मील दूर हुई.
‘अमेरिका ने जो किया उसे उस पर अत्यधिक पछतावा होगा’
अब्बास अराघची ने सोशल प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘करीब 130 नाविकों को ले जा रहे एवं भारत की नौसेना के अतिथि पोत ‘फ्रिगेट देना’ पर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में बिना किसी चेतावनी के हमला किया गया. मेरी बात याद रखना- अमेरिका ने जो उदाहरण पेश किया है, उसे उस पर अत्यधिक पछतावा होगा.’ ईरानी पोत हाल में भारत द्वारा आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय नौसैन्य अभ्यास में शामिल हुआ था.
अमेरिकी पनडुब्बी ने बनाया निशाना
पीट हेगसेथ ने वॉशिंगटन में कहा था कि एक अमेरिकी पनडुब्बी ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक ईरानी युद्धपोत को टॉरपीडो से डुबो दिया। उनके अनुसार द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहली घटना है जब किसी दुश्मन के युद्धपोत को टॉरपीडो से डुबो दिया गया है। हेगसेथ ने पत्रकारों से कहा कि ईरानी युद्धपोत अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में खुद को सुरक्षित समझ रहा था, लेकिन उसे पर टॉरपीडो से डुबो दिया गया.’




