Tuesday, February 3, 2026
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Ranjit Ranjan : स्वास्थ्य बीमा कंपनियों की मनमानी पर संसद में गरजे सांसद, अनुचित दावा खारिज करने वालों पर सख्त कार्रवाई की मांग

राज्यसभा में कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने स्वास्थ्य बीमा कंपनियों की मनमानी पर चिंता जताते हुए मांग की कि इरडा के दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन कराया जाए और अनुचित तरीके से दावा ठुकराने पर कंपनियों पर कार्रवाई हो। उन्होंने कहा कि तकनीकी या तुच्छ कारणों से दावे खारिज होने से मरीज और परिजन मानसिक व आर्थिक संकट झेलते हैं।

Ranjit Ranjan : नई दिल्ली। स्वास्थ्य बीमा कंपनियों की कथित मनमानी और इसकी वजह से बीमा कराने वाले को होने वाली परेशानी पर चिंता जताते हुए राज्यसभा में मंगलवार को कांग्रेस की एक सदस्य ने मांग की कि भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण के दिशा निर्देशों का कठोर एवं अनिवार्य रूप से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए एवं अनुचित तरीके से दावा ठुकराने पर बीमा कंपनी पर कार्रवाई की जाए।

तकनीकी बहानों से दावे खारिज होने पर जताई गहरी चिंता

कांग्रेस की रंजीत रंजन ने शून्यकाल के दौरान स्वास्थ्य बीमा कंपनियों की कथित मनमानी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कई दावे विभिन्न तकनीकी कारणों या मामूली वजहों से खारिज कर दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि कई बार दस्तावेज पूरे होने पर भी दावा खारिज किया जाता है, कभी कह दिया जाता है कि यह बीमारी दावा करने वाले को पहले से ही थी। उन्होंने कहा, इससे मरीज और उसके परिजन संकट के समय में आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान हो जाते हैं।

रंजन ने कहा कि कंपनियां डॉक्टर से ज्यादा नहीं जानतीं, फिर भी वह दावा खारिज करने के लिए ऊटपटांग तर्क देती हैं। ऐसी कंपनियां एक तरह से आम लोगों का ‘‘दुरूपयोग’’ कर रही हैं। उन्होंने कहा, यह अमानवीय प्रवृत्ति है। दस्तावेज पूरे मांगे जाते हैं लेकिन विचित्र बहाने बना कर दावे खारिज कर दिए जाते हैं। यह अन्याय है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति स्वास्थ्य बीमा इसलिए कराता है ताकि उसके बुरे वक्त में उसका ही पैसा काम आ जाए और उसे किसी के सामने हाथ न फैलाना पड़े। ‘‘लेकिन बीमा कंपनियां बड़ी बड़ी बातें करती हैं, पॉलिसी लेते समय कई दस्तावेज ले लेती हैं और बाद में मामूली बातों का तर्क दे कर दावा खारिज कर देती हैं।’’

रंजीत रंजन ने इरडा के दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन कराने पर दिया जोर

रंजन ने मांग की कि इरडा के दिशा निर्देशों का कठोर एवं अनिवार्य अनुपालन सुनिश्चित किया जाए तथा अनुचित तरीके से दावा ठुकराने पर बीमा कंपनी पर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि दावा प्रक्रिया पारदर्शी सरल और सुगम होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक राष्ट्रीय शिकायत पोर्टल स्थापित किया जाना चाहिए जिसमें उपभोक्ता अपनी शिकायत दर्ज करा सकें। रंजन के अनुसार, कंपनियों को कहा जाए कि वह तुच्छ कारणों से दावे न ठुकराएं और मेडिकल बोर्ड की अनुमति के बिना भी दावे न ठुकराएं। भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई या इरडा) भारत में बीमा क्षेत्र को नियंत्रित और विकसित करने वाली सर्वोच्च वैधानिक संस्था है, जिसकी स्थापना 1999 के अधिनियम के तहत की गई थी।

शून्यकाल में भाजपा के बालयोगी उमेशनाथ ने मध्य प्रदेश की क्षिप्रा नदी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस नदी की सफाई के लिए ‘नमामि गंगे’ जैसी परियोजना चलाई जाए। उच्च स्तरीय कार्यबल बनाया जाए ताकि सिंहस्थ कुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह नदी साफ हो सके। बीजू जनता दल के देवाशीष सामंत राय ने हाल ही में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर ओडिशा के कटक में बन रही एक इमारत से जुड़ा मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने अपने कार्यकाल में इसकी मंजूरी दी थी लेकिन इमारत बनने के बाद हाल ही में जब उसका उद्घघाटन हुआ तो पटनायक को ही आमंत्रित नहीं किया गया। उन्होंने मांग की कि कटक के जिलाधिकारी को विशेषाधिकार हनन नोटिस दिया जाए। शून्यकाल में ही भाजपा के डॉ सिकंदर कुमार ने सैनिकों और पूर्व सैनिकों के लिए कैंटीन का मुद्दा उठाया। उन्होंने ऐसे कैंटीनों की संख्या बढ़ाने की मांग की।

Mukesh Kumar
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