इस्लामाबाद। अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में आयोजित उच्चस्तरीय वार्ता बिना किसी ठोस परिणाम के समाप्त हो गई। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने बताया कि 21 घंटे से अधिक समय तक चली गहन बातचीत के बावजूद दोनों देशों के बीच मतभेद दूर नहीं हो सके।
यह वार्ता पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुई और इसे इसलिए भी अहम माना जा रहा था क्योंकि 1979 के बाद पहली बार दोनों पक्ष इस स्तर पर आमने-सामने आए। बातचीत के बाद प्रेस वार्ता में वेंस ने कहा कि कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई, लेकिन अंततः कोई समझौता नहीं बन पाया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका ने अपने रुख को साफ तौर पर सामने रखा था, विशेषकर उन मामलों में जहां वह किसी प्रकार की रियायत देने को तैयार नहीं है।
वेंस के अनुसार, ईरानी पक्ष ने अमेरिकी प्रस्तावों और शर्तों को स्वीकार नहीं किया, जिसके चलते बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी। हालांकि उन्होंने मुख्य अड़चनों के बारे में विस्तार से जानकारी देने से इनकार किया, लेकिन यह जरूर कहा कि अमेरिका चाहता है कि ईरान स्पष्ट रूप से यह प्रतिबद्धता जताए कि वह परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में कदम नहीं उठाएगा। उन्होंने दोहराया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रमुख उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने वार्ता की मेजबानी के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर की सराहना करते हुए कहा कि मेजबान देश ने दोनों पक्षों के बीच मतभेद कम करने की पूरी कोशिश की। इस बीच, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने भी पुष्टि की कि बातचीत किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी। उन्होंने बताया कि वार्ता के दौरान परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज जलडमरूमध्य, प्रतिबंधों में ढील, युद्ध से जुड़े मुद्दों और क्षेत्रीय स्थिति जैसे कई विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।
बकाई ने कहा कि इस तरह की कूटनीतिक प्रक्रिया की सफलता सभी पक्षों की गंभीरता, सद्भावना और एक-दूसरे के वैध हितों को स्वीकार करने पर निर्भर करती है। उन्होंने वार्ता की मेजबानी के लिए पाकिस्तान का आभार व्यक्त किया।
लंबी बातचीत के बावजूद परिणाम न निकलना यह दर्शाता है कि दोनों देशों के बीच मतभेद अभी भी गहरे हैं और समाधान की राह आसान नहीं है।



