Sunday, January 11, 2026
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‘सोमनाथ मंदिर को नष्ट करने वाले इतिहास में सिमटे’, स्वाभिमान पर्व पर पीएम मोदी बोले, ‘लेकिन 1000 साल बाद भी सोमनाथ का झंडा शान से लहरा रहा’

Somnath Swabhiman Parv: सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि सोमनाथ मंदिर का इतिहास विनाश नहीं, बल्कि विजय और पुनर्निर्माण का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि मंदिर को नष्ट करने वाले आततायी इतिहास में सिमट गए, लेकिन 1000 साल बाद भी सोमनाथ का ध्वज शान से लहरा रहा है.

Somnath Swabhiman Parv: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को सोमनाथ स्वाभिमान पर्व को संबोधित करते हुए कहा कि आजादी के बाद गुजरात में सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का विरोध करने वाली ताकतें अब भी सक्रिय हैं और भारत को उन्हें हराने के लिए सतर्क, एकजुट तथा शक्तिशाली बने रहने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि सोमनाथ का इतिहास विनाश और पराजय का नहीं, बल्कि विजय और पुनर्निर्माण का है. उन्होंने कहा कि यह समय का चक्र है जिसके तहत आततायी अब इतिहास के पन्नों में सिमट गए हैं लेकिन सोमनाथ मंदिर आज भी शान से खड़ा है.

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 1026 ईस्वी में महमूद गजनी द्वारा सोमनाथ मंदिर पर किए गए आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे होने के मौके पर आयोजित किया गया है. इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा, ‘नफरत, अत्याचार और आतंक का सच्चा इतिहास हमसे छिपाया गया और हमें सिखाया गया कि यह हमला मंदिर को लूटने का प्रयास था.’

‘पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की शपथ ली’

मोदी ने कहा कि यदि सोमनाथ पर हमला धन-संपत्ति लूटने के लिए किया गया होता, तो पहला हमला ही काफी था लेकिन इस पर बार-बार हमले किए गए और इसके देवता का अपमान किया गया. उन्होंने कहा कि आजादी के बाद जब सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की शपथ ली, तो उनके रास्ते में बाधाएं खड़ी की गईं.

‘सोमनाथ मंदिर पुनर्निर्माण में बाधा डालने वाली ताकतें आज भी मौजूद’

मोदी ने कहा, ‘तुष्टीकरण में लिप्त लोगों ने चरमपंथी मानसिकता वाले लोगों के सामने घुटने टेक दिए. सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण में बाधा डालने वाली ताकतें आज भी हमारे बीच मौजूद हैं. ऐसी ताकतों को हराने के लिए हमें सतर्क, एकजुट और शक्तिशाली बने रहने की जरूरत है.’

‘1000 साल बाद भी सोमनाथ का झंडा शान से लहरा रहा’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘सोमनाथ की कहानी भारत की कहानी है. विदेशी आततायियों ने इस मंदिर की तरह कई बार भारत को नष्ट करने की कोशिश की. आततायियों ने सोचा कि मंदिर को नष्ट करके उन्होंने जीत हासिल कर ली है लेकिन 1000 साल बाद भी सोमनाथ का झंडा शान से लहरा रहा है. उन्होंने कहा कि विश्व के इतिहास में इन 1,000 वर्षों के संघर्ष की कोई बराबरी नहीं है.

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Premanshu Chaturvedi
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