India Russian Oil Purchase: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के चलते वैश्विक ऑयल सप्लाई को बुरी तरह प्रभावित किया है. जिसका भारत पर भी काफी असर पड़ा है. इस तेल संकट को देखते हुए अमेरिका ने समुद्र में मौजूद रूसी तेल टैंकरों से कच्चे तेल को खरीदने और भारतीय रिफाइनरियों तक पहुंचाने की अस्थायी छूट दी है. अब इस पर व्हाइट हाउस की तरफ से बयान सामने आया है.
‘व्हाइट हाउस’ की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा है कि अमेरिका ने ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भारत को समुद्र में पोत पर पहले से मौजूद रूसी तेल स्वीकार करने की अनुमति अस्थायी रूप से दी है और इस अल्पकालिक कदम से रूस को कोई बड़ा वित्तीय लाभ नहीं होगा.
‘कदम से रूस को नहीं होगा कोई बड़ा वित्तीय लाभ’
लेविट ने मंगलवार को ‘व्हाइट हाउस’ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और पूरी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम ने यह फैसला इसलिए लिया क्योंकि भारत अच्छा सहयोगी रहा है और उसने प्रतिबंधित रूसी तेल खरीदना पहले बंद कर दिया था.’उन्होंने कहा, ‘ईरानियों की वजह से दुनिया भर में तेल आपूर्ति में आई अस्थायी कमी को दूर करने की हमारी कोशिशों के बीच हमने उन्हें (भारत को) रूसी तेल स्वीकार करने की अस्थायी अनुमति दी है. यह रूसी तेल पहले से समुद्र में था. हमें नहीं लगता कि इस अल्पकालिक कदम से रूस सरकार को इस समय कोई बड़ा वित्तीय लाभ होगा.’
लेविट ने पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष की पृष्ठभूमि में भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की छूट देने संबंधी अमेरिका के फैसले को लेकर पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए यह टिप्पणी की. अमेरिका ने ईरान के साथ संघर्ष के बीच पिछले सप्ताह कहा था कि वह भारतीय रिफाइनरी को रूसी तेल खरीदने की अनुमति देते हुए 30 दिन की अस्थायी छूट जारी कर रहा है.
रूसी तेल खरीद पर लगाया था 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ
गौरतलब है कि ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने पर भारत पर 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क लगाया था और अमेरिकी प्रशासन ने आरोप लगाया था कि नयी दिल्ली की खरीद से यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में रूस को मदद मिल रही है. इसके बाद, पिछले महीने अमेरिका और भारत ने घोषणा की थी कि उन्होंने व्यापार पर एक अंतरिम समझौते की रूपरेखा तैयार कर ली है. इसके साथ ही ट्रंप ने भारत पर लगाए गए 25 प्रतिशत शुल्क को हटाने संबंधी एक शासकीय आदेश जारी किया था. उन्होंने कहा था कि भारत ने मॉस्को से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से ऊर्जा आयात बंद करने और अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है.




