Sunday, January 18, 2026
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West Bengal SIR Controversy : बीएलओ अस्पताल में भर्ती, तृणमूल कांग्रेस ने ‘लगातार काम के बोझ को’ वजह बताया, अब तक हो चुकी है कई मौतें

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना में एसआईआर प्रक्रिया में लगे बूथ स्तरीय अधिकारी महबूब रहमान मुल्ला को मस्तिष्काघात के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया है। तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग और भाजपा के असहनीय दबाव के कारण उनकी तबीयत बिगड़ी, जबकि परिवार ने लंबे समय तक 20 घंटे से अधिक काम और बढ़ते तनाव को इसकी वजह बताया।

West Bengal SIR Controversy : कोलकाता। पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रकिया में शामिल एक बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) को मस्तिष्काघात के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह जानकारी रविवार को एक अधिकारी ने दी। अधिकारी ने बताया कि जिले के रायदीघी क्षेत्र के मथुरापुर प्रखंड के बीएलओ महबूब रहमान मुल्ला ने शनिवार रात स्वास्थ्य खराब होने की शिकायत की। उन्होंने कहा कि बीएलओ को पहले डायमंड हार्बर अस्पताल ले जाया गया, जहां से उन्हें शहर के एक अन्य अस्पताल में रेफर कर दिया गया।

एसआईआर प्रक्रिया को लेकर टीएमसी का तीखा हमला

तृणमूल कांग्रेस ने रविवार को आरोप लगाया कि मुल्ला लगातार काम के दबाव के कारण बीमार पड़ गए और इसकी वजह निर्वाचन आयोग तथा केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार की ओर से दिया गया ‘‘असहनीय दबाव’’ है। परिवार के सदस्यों ने दावा किया कि मुल्ला चार नवंबर से मथुरापुर प्रखंड-2 के बूथ संख्या 110 पर एसआईआर कवायद में व्यस्त थे, और एसआईआर के दबाव तथा स्कूल के काम से निपटने के लिए 20 घंटे से अधिक समय से काम कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बूथ पर कई मतदाताओं को सुनवाई का नोटिस मिलने के बाद वह और अधिक तनाव में आ गए थे।

तृणमूल कांग्रेस ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘भाजपा और उसके आज्ञाकारी निर्वाचन आयोग की संवेदनहीन एवं रक्तरंजित एसआईआर ने सारी हदें पार कर दी हैं।’’ पार्टी ने कहा, ‘‘दक्षिण 24 परगना के रायदीघी में बीएलओ का काम कर रहे 52 वर्षीय स्कूल शिक्षक महबूब रहमान मुल्ला ने बच्चों को शिक्षित करने में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया लेकिन असहनीय एसआईआर दबाव के कारण बेहोश हो गए और उन्हें मष्तिकाघात हुआ है। आज वह अस्पताल में जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं।’’

TMC पहले भी उठा चुकी हैं मौतों का मुद्दा

तृणमूल कांग्रेस ने कहा, ‘‘उनके परिवार का साफ कहना है कि लगातार निशाने पर रहने, डर के माहौल और इस निर्दयी एसआईआर के निरंतर दबाव ने उन्हें तोड़ दिया। इस पागलपन को रोकने के लिए भाजपा के समक्ष और कितनी लाशों के ढेर लगाने होंगे? भाजपा के हाथ खून से सने हैं, और बंगाल हर एक बूंद को याद रखेगा। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 12 जनवरी को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर दावा किया था कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान ‘‘पहले ही 77 लोगों की मौत हो चुकी है।’’

Mukesh Kumar
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