Monirul Islam FIR case : कोलकाता। निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित समयसीमा समाप्त होने के 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के विधायक मोनिरुल इस्लाम के खिलाफ कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों के मुताबिक पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया के दौरान मुर्शिदाबाद जिले के फरक्का ब्लॉक विकास कार्यालय (बीडीओ) में तोड़फोड़ की घटना के सिलसिले में टीएमसी के विधायक मोनिरुल इस्लाम की भूमिका संदिग्ध है।
चुनाव आयोग के निर्देश के बाद भी FIR नहीं
निर्वाचन आयोग ने बृहस्पतिवार को मुर्शिदाबाद के जिला मजिस्ट्रेट-सह-जिला निर्वाचन अधिकारी को निर्देश दिया था कि फरक्का बीडीओ कार्यालय में 14 जनवरी को हुई हिंसा में इस्लाम की कथित भूमिका के लिए उसी दिन शाम पांच बजे तक उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए। हालांकि, पुलिस सूत्रों ने बताया कि अभी तक कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, हमें अभी तक कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। इसलिए, कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है।
इस देरी ने निर्वाचन आयोग के निर्देश के कार्यान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आयोग ने 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले एसआईआर प्रक्रिया के दौरान कानून व्यवस्था को सख्ती से लागू करने पर बल दिया है।
पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग बनाम प्रशासन
फरक्का बीडीओ कार्यालय में 14 जनवरी को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान हिंसा भड़क उठी थी, जब स्थानीय विधायक के नेतृत्व में लोगों के एक समूह ने कथित तौर पर परिसर में तोड़फोड़ की थी। इस घटना का संज्ञान लेते हुए आयोग ने इससे पहले पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार से बात की थी और प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया था। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने प्रशासनिक प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए हैं।




