Akhand Deepak Centenary Celebration 2026 : जयपुर। वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी एवं अखण्ड दीपक शताब्दी समारोह के अंतर्गत बुधवार को हरिद्वार के बैरागी कैंप में पर्यावरण एवं वातावरण शुद्धि को लेकर एक संकल्प कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाना और समाज को इसके प्रति जागरूक करना रहा।
प्रकृति संतुलन बिना भविष्य सुरक्षित नहीं : डॉ. चिन्मय पंड्या
शताब्दी समारोह 2026 के दलनायक एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या ने अपने उद्बोधन में पर्यावरण संकट पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज जल, जमीन और वायु—तीनों ही प्रदूषित हो चुके हैं। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो इसके गंभीर परिणाम आने वाली पीढ़ियों को भुगतने पड़ेंगे। डॉ. पंड्या ने कहा कि हमें अधिक से अधिक पौधे लगाकर धरती को रहने योग्य बनाना होगा, अन्यथा भविष्य की पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेंगी। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को केवल अभियान नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व बताया और सभी से इसमें सक्रिय भागीदारी की अपील की।
अखण्ड दीपक शताब्दी समारोह में पर्यावरण संरक्षण पर जोर
डॉ. चिन्मय पंड्या ने यह भी कहा कि शताब्दी समारोह केवल स्मृति का आयोजन नहीं है, बल्कि समाज के लिए जिम्मेदारी तय करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाए बिना मानव जीवन का भविष्य सुरक्षित नहीं हो सकता। इसलिए पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाना आवश्यक है।
कार्यक्रम में जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि आचार्य, हरिद्वार एवं मुंबई की प्रमुख आध्यात्मिक संस्थाओं के अध्यक्ष स्वामी विश्वेश्वरानंद, पतंजलि योगपीठ के संस्थापक स्वामी रामदेव, उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री की रणनीतिक सलाहकार समिति के सदस्य मनु गौड़, ‘रिवरमैन ऑफ इंडिया’ के रूप में प्रसिद्ध रमण कांत तथा भारतीय सरकारी अधिकारी भूपेन्द्र कंथोला सहित कई विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और वृक्षारोपण की आवश्यकता पर अपने विचार रखे।

कार्यक्रम के समापन पर सभी अतिथियों द्वारा तरु-पूजन किया गया। इस अवसर पर यह संकल्प लिया गया कि देश के विभिन्न जोनों से जुड़े गायत्री परिवार के परिजन मिलकर 2400 से अधिक पौधों का रोपण करेंगे। इस पहल का उद्देश्य पर्यावरण संतुलन बनाए रखना, वायु शुद्धि को बढ़ावा देना और भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य तैयार करना है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साधक, छात्र एवं पर्यावरण प्रेमी उपस्थित रहे। आयोजन के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया गया।




