Middle East Conflict Update : दुबई। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के लिए ईरान को दी गई समयसीमा बढ़ा दी है, साथ ही उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर हमले को अब पांच दिन के लिए टाल देगा। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी दूत एक ‘‘सम्मानित’’ ईरानी नेता के साथ बातचीत कर रहे हैं और ईरान ‘‘समझौता करना चाहता है। वहीं ईरान के अधिकारियों ने ऐसी किसी भी बात से साफ इनकार किया और कहा कि ईरान की कड़ी चेतावनी के बाद’’ अमेरिकी राष्ट्रपति ने पीछे हटने का निर्णय किया।
ईरान में संघर्ष में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,500 से अधिक
ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका समझौते के तहत ईरान के संवर्धित यूरेनियम को वहां से निकालना और उसके परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करना चाहेगा। उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘‘हम कोई परमाणु बम या परमाणु हथियार नहीं देखना चाहते।” इस बीच ईरान में संघर्ष में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,500 से अधिक जबकि लेबनान में 1,000 से अधिक पहुंच गई है। वहीं इजराइल में 15 और 13 अमेरिकी सैन्य कर्मी मारे गए हैं। इसके अलावा, खाड़ी क्षेत्र में भी कई नागरिक मारे गए है। ईरान और लेबनान में लाखों लोग विस्थापित हुए हैं।

उत्तरी इजराइल में एक संभावित हमले की सूचना के बाद मंगलवार तड़के राहत एवं बचाव टीम घटनास्थल पर पहुंचीं। ‘होम फ्रंट कमांड’ के मुताबिक, इलाके में किसी वस्तु के गिरने की खबर मिली थी, जिसके बाद बचाव अभियान शुरू किया गया। लोगों से अपील की गई कि वे उस क्षेत्र में एकत्र न हों। इससे पहले इजराइली सेना ने चेतावनी दी थी कि ईरान की ओर से इजराइल की तरफ मिसाइलें दागी जा रही हैं। इस बीच, इजराइल की वायुसेना ने बेरूत के दक्षिणी उपनगरों पर जोरदार हवाई हमले किए। सेना का कहना है कि इन हमलों का लक्ष्य हिज्बुल्ला के ठिकाने और बुनियादी ढांचे थे, इन हमलों में किसी के हताहत होने की फिलहाल कोई सूचना नहीं है। हमलों के दौरान बहुत नीचे उड़ते लड़ाकू विमानों की आवाज़ें सुनी गईं, जिससे इलाके में दहशत फैल गई।
लेबनान में 1,000 से अधिक लोगों की मौत
लेबनानी अधिकारियों ने कहा है कि इजराइली हमलों में अब तक लेबनान में 1,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 10 लाख लोग विस्थापित हो गए हैं। इसी बीच, संयुक्त राष्ट्र में यूक्रेन के राजदूत ने रूस और ईरान के बीच सैन्य सहयोग बढ़ने को लेकर चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यह सहयोग क्षेत्रीय संघर्ष को और गंभीर बना सकता है और वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकता है। मिस्र के एक अधिकारी ने बताया अमेरिका और ईरान के बीच सप्ताहांत में मिस्र, तुर्किये और पाकिस्तान के माध्यम से ‘‘संदेशों’’ का आदान-प्रदान हुआ। उन्होंने बताया कि इन संदेशों का उद्देश्य ईरान और पूरे क्षेत्र में ऊर्जा अवसंरचना पर संभावित हमलों को टालना था। उन्होंने कहा, ‘‘फिलहाल यही सर्वोच्च प्राथमिकता है।’’



