वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने बयानों से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। व्हाइट हाउस में आयोजित ईस्टर कार्यक्रम के दौरान उन्होंने नाटो देशों पर निशाना साधते हुए कहा कि संकट के समय कई सहयोगी देश अमेरिका का पूरा साथ नहीं देते।ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि अमेरिका पर जब भी मुश्किल हालात आते हैं, तब कुछ NATO देश अपेक्षित सहयोग नहीं करते। उन्होंने गठबंधन की भूमिका और उसकी प्रतिबद्धता पर सवाल उठाते हुए इशारों में बड़े संघर्ष की आशंका भी जताई।
इस दौरान ट्रंप ने खुद को “राजा” कहे जाने के मुद्दे का भी जिक्र किया, जिसे लेकर राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई है। उन्होंने धार्मिक संदर्भ देते हुए कहा कि जैसे यीशु मसीह को “राजा” कहा गया था, वैसे ही कुछ लोग उन्हें भी इस रूप में देखते हैं। हालांकि उन्होंने इसे हल्के अंदाज में पेश किया। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान के साथ टकराव का जिक्र करते हुए ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका और उसके सहयोगियों ने स्थिति में बढ़त बनाई है, लेकिन हालात अभी भी संवेदनशील बने हुए हैं।
ट्रंप के इस बयान को उनके समर्थक जहां स्पष्ट और मजबूत नेतृत्व का संकेत मान रहे हैं, वहीं विरोधी इसे एक और विवादित टिप्पणी बता रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयान नाटो जैसे अहम गठबंधन की एकजुटता पर असर डाल सकते हैं और वैश्विक स्तर पर नई बहस को जन्म दे सकते हैं।



